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Govardhan Puja 2019 History And Importance: द्वापर युग में ऐसे हुई थी गोवर्धन पूजा की शुरुआत, जानें अन्नकूट और भैया दूज का इतिहास

Govardhan Puja 2019 History And Importance: द्वापर युग में ऐसे हुई थी गोवर्धन पूजा की शुरुआत, जानें अन्नकूट और भैया दूज का इतिहास

Govardhan and Annakut Puja 2019 History: गोवर्धन पूजा और अन्नकूट पूजा का इतिहास भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं से जुड़ा हुआ है। इसका प्रारंभ द्वापर युग में हुआ था। गोवर्धन पूजा और अन्नकूट पूजा दिवाली के अगले दिन होता है। यह हर वर्ष कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष के प्रतिपदा को मनाया जाता है। इस दिन भगवान श्रीकृष्ण के कहने पर गोवर्धन पर्वत की पूजा की जाने लगी और अन्नकूट पर भगवान श्रीकृष्ण को अनके प्रकार के व्यंजनों का भोग लगाया जाने लगा। आइए जानते हैं कि गोवर्धन पूजा और अन्नकूट पूजा का इतिहास क्या है और य​ह क्यों मनाया जाता है।

1. गोवर्धन पूजा या अन्नकूट पूजा

मूसलाधार बारिश से बचाने के लिए भगवान श्रीकृष्ण ने 7 दिनों तक गोवर्धन पर्वत को अपनी अंगुली पर उठाए रखा। इससे इंद्र क्रोधित हो उठे, बारिश और तेज कर दी। उस गोवर्धन के नीचे सभी ब्रजवासी सुरक्षित थे। श्रीकृष्ण ने सातवें दिन पर्वत को नीचे रखा और गोवर्धन पूजा के साथ अन्नकूट मनाने को कहा। तब से दिवाली के अगले दिन यानी कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा को गोवर्धन पूजा और अन्नूकट मनाया जाने लगा।

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2. भैया दूज 

दिवाली के पांचवे दिन का पर्व है- भैया दूज। यमराज ने अपनी बहन को वरदान दिया था कि वे हर वर्ष कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया ​तिथि को उनसे मिलने आएंगे, इसलिए हर वर्ष दीपावली के एक दिन बाद भैया दूज का पर्व मनाया जाता है।

3. श्रीराम के अयोध्या आगमन पर दीपोत्सव

रामायण में बताया गया है कि भगवान श्रीराम जब लंका के राजा रावण का वध कर पत्नी सीता और भाई लक्ष्मण के साथ अयोध्या वापस लौटे तो उस दिन पूरी अयोध्या नगरी दीपों से जगमगा रही थी। भगवान राम के 14 वर्षों के वनवास के बाद अयोध्या आगमन पर दीपावली मनाई गई थी, हर नगर हर गांव में दीपक जलाए गए थे। तब से दीपावली का यह पर्व अंधकार पर विजय का पर्व बन गया और हर वर्ष मनाया जाने लगा।

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