गुरू चौथे भाव में
चतुर्थ भाव में अगर गुरू हो तो घरेलू सुख,सम्पत्ति,वाहन,सोने के गहने,सन्तान सुख,नौकरी में पदोन्नति मिलती है।पुखराज धारण करने से इन सब चीजों के सुख में वृद्धि होती है।
विभिन्न लग्नों में चौथे भाव में गुरू हो तो पुखराज धारण करने से क्या लाभ होगा,नीचे दिया गया है-
1.मेष लग्न –
गुरू भाग्येश-द्वादशेश होकर चौथे घर में उच्च राशि में स्थित होगा। पुखराज धारण करने से मकान,वाहन की प्राप्ति होगी,विदेश यात्रा से लाभ रहेगा।
2.वृष लग्न –
गुरू अष्टमेश-लाभेश होकर चौथे घर में सिंह राशि में स्थित होगा। पुखराज धारण करने से गुप्त धन लाभ होगा।विरासत में धन सम्पत्ति मिल सकती है। किसी अज्ञात स्त्रोत से धन लाभ होगा।
3.मिथुन लग्न –
गुरू सप्तमेश – दशमेश होकर चौथे भाव में कन्या राशि में स्थित होगा। पति-पत्नी सुख मिलेगा।दशमेश होकर चौथे भाव में कन्या राशि में स्थित होगा। पति-पत्नि सुख मिलेगा,घरेलू शान्ति रहे। कारोबार बढ़े,मान प्रतिष्ठा मिलेगी।अविवाहितों को नौकरी करने वाली पत्नी मिले ।
4.कर्क लग्न –
गुरू षष्ठेश – भाग्येश होकर चौथे भाव में तुला राशि में स्थित होगा। पुखराज धारण करना लाभकारी रहेगा।
5. सिंह लग्न –
गुरू पंचमेश -अष्टमेश होकर चतुर्थ भाव में वृश्चिक राशि में स्थित होगा। पुखराज धारण करना लाभकारी है। गुप्त धन लाभ होगा। विरासत में धन सम्पत्ति मिलेगी।
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