श्रीमहाकालाष्टकम्
प्रणम्य खारूनतीरसंस्थितमहाकालं परब्रह्मरूपं
ज्वलज्जटाजूटगङ्गाधरं त्रिनयनं कालान्तकं नित्यशान्तम्।
भवभयहारि मनोहरं मुनिवरैः सेव्यं समाधिस्थितं
अमलेश्वरं शशिशेखरं शरणं महाकालमीडे सदा॥1
गले गजचर्मविभूषणं, भस्माङ्गरागं दिगम्बरं
कपालपाणिं करालवक्त्रम्, करुणारसार्द्रं शमप्रदम्।
विनाशनं भवरोगणां, विधिविष्णुसेव्यं शिवं परं
स्मरान्तकं खड्गहस्तकं, महाकालनाथं नमाम्यहम्॥2
अपनी कुंडली पर जवाब चाहिए?
AstroShrine ऐप पर अनुभवी ज्योतिषियों से चैट या कॉल करें — हिंदी और English में।
यः कालकालो युगान्तकृत्, सुरासुराणां विनाशकृत्
समस्तलोकप्रपञ्चधारी, समाधिगम्यः सदा सुखी।
स ऋद्धिदः सिद्धिदः शिवो, मनीषिणां मोक्षसाधनः
स खारुनीयं महेश्वरः, नमामि देवं निरामयम्॥3
विक्रमदित्यप्रपूजितं शशिकल्पशुद्धं महामुनिभिः
शङ्कराचार्यनिषेवितं, समराग्रणीभिः कथाश्रयम्।
नरपतिनां वरदं सदा, सुरवृन्दवन्दितपादुकम्
द्विजवरदं, शरणागतं, नमामि शंभुं अमोघकम्॥4
आप इस लेख का आधा भाग पढ़ चुके हैं
आगे पढ़ने के लिए लॉगिन करें। खाता बनाना पूरी तरह निःशुल्क है – Google या मोबाइल OTP से, एक मिनट में।
लॉगिन करें और आगे पढ़ें नया यूज़र? निःशुल्क खाता बनाएँआगे पढ़ने के लिए लॉगिन करें
इस लेख का 50% भाग आपने निःशुल्क पढ़ लिया। बाकी लेख, और Future For You के सभी ज्योतिष, वास्तु व राशिफल लेख पढ़ने के लिए बस एक बार लॉगिन करें।
- पूरी तरह निःशुल्क – कोई शुल्क नहीं
- Google से एक क्लिक, या मोबाइल OTP
- लॉगिन के बाद सीधे इसी लेख पर वापस