नवरात्र भारतीयों का प्रमुख़ धार्मिक पर्व है। इसके नौ अलग-अलग दिनों में अलग-अलग देवी की पूजा की जाती है। नवरात्र का पर्व साल में चार बार (चैत्र, आषाढ़, अश्विन और माघ में) आता है। लेकिन इनमें चैत्र और अश्विन (शरद) नवरात्रि का विशेष महत्व है। चैत्र नवरात्रि बसंत ऋतु में पड़ती है इसलिए इसे बसंत नवरात्रि भी कहते हैं। माना जाता है कि इसके आखिरी दिन भगवान राम का जन्म हुआ था इसलिए इसे राम नवरात्रि के नाम से भी जाना जाता है। श्रद्धालु नवरात्रि के पहले दिन से लेकर नौवें दिन तक उपवास रखते हैं और मां दुर्गा के सभी नौ रूपों की उपासना करते हैं। मान्यता है कि ऐसा करने से मां आपसे प्रसन्न होती हैं और आपकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण करती हैं।
चैत्र नवरात्रि पर रहेंगे ये ज्योतिषीय योग
हिंदू धर्म के सभी त्योहारों का अपना महत्व है। मगर कोई भी त्योहार तब और ख़ास हो जाता है जब उस दौरान कोई ज्योतिषीय योग होता है। ज्योतिष विशेषज्ञों के अनुसार इस बार की नवरात्रि पर एक साथ कई महत्वपूर्ण ज्योतिषीय योग बन रहे हैं। इस दौरान चार स्वार्थसिद्धि योग, एक अमृतसिद्धि, एक द्विपुष्कर, 6 रवि योग और एक गुरु पुष्य योग बनेगा।
ज्योतिषविद्या में इन सभी योगों को बेहद शुभ माना जाता है। इस दौरान सभी तरह के शुभ कार्य किए जाते हैं। इस नवरात्रि की एक ख़ास बात यह भी है कि इस दौरान कई तरह के शुभ योग होने से किसी भी तिथि का क्षय नहीं हो रहा है जिसके कारण श्रद्धालु पूरे नौ दिन मां दुर्गा की आराधना कर सकेंगे। यह नवरात्रि बेहद ख़ास है इसलिए मां दुर्गा आप पर मेहरबान रहेंगी। सच्चे मन से उनकी उपासना कर आप अपनी कोई भी इच्छा पूर्ण कर सकते हैं।
चैत्र नवरात्र 2020: तिथि व मुहूर्त
चैत्र नवरात्रि हर वर्ष चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से शुरु होकर नवमी तक रहती है। इससे संबंधित महत्वपूर्ण तिथियां व मुहूर्त निम्न हैं:
- नवरात्रि तिथि प्रारंभ: बुधवार, 25 मार्च, 2020
- नवरात्रि तिथि समाप्त: शुक्रवार, 3 अप्रैल, 2020
- घटस्थापना मुहूर्त: प्रात: 6:19 बजे से 7:17 बजे तक (बुधवार, मार्च 25, 2020)
- अवधि: 58 मिनट
- प्रतिपदा तिथि प्रारंभ: अपराह्न 2:57 बजे (मंगलवार, मार्च 24, 2020)
- प्रतिपदा तिथि समाप्त: अपराह्न 5:26 बजे (बुधवार, मार्च 25, 2020)
- मीन लग्न प्रारंभ: प्रात: 6:19 बजे (बुधवार, मार्च 25, 2020)
- मीन लग्न समाप्त: प्रात: 7:17 बजे (बुधवार, मार्च 25, 2020)
चैत्र नवरात्रि का महत्व
हिंदू पंचांग के अनुसार चैत्र शुक्ल प्रतिपदा विक्रम संवत् का पहला दिन है। चैत्र माह से ही हिंदू नववर्ष की शुरुआत होती है। माना जाता है कि इसी दिन कालगणना की शुरुआत हुई थी। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार भगवान ब्रह्मा ने देवी दुर्गा के कहने पर ही इसी दिन सृष्टि की रचना की थी। इसी दिन सूर्य की पहली किरण पृथ्वी पर फैली थी। 9 ग्रह, 27 नक्षत्र और 12 राशियों का उदय इसी दिन हुआ था। एक अन्य मान्यता के अनुसार भगवान विष्णु के मत्स्य अवतार का जन्म भी इसी दिन हुआ था।
चैत्र नवरात्रि मौसम में बदलाव का भी प्रतीक है। इस दौरान शीत ऋतु के गमन के बाद ग्रीष्म ऋतु का आगमन धीरे-धीरे होने लगता है। मौसम में परिवर्तन के कारण कई तरह के रोगों का सामना भी करना पड़ता है इसलिए श्रद्धालु अपनी रोग प्रतिरोधक क्षमता को मज़बूत करने के लिए व्रत करते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार नवरात्रि का हर दिन शुभ होता है इसलिए इसके नौ दिनों में कोई भी शुभ कार्य बिना मुहूर्त के किए जा सकते हैं।
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