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नकारात्मक ऊर्जा करना है दूर तो करें आसान से उपाय…

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नकारात्मक ऊर्जा करना है दूर तो करें आसान से उपाय…

इस लेख में आपके मन में आने वाले नकारात्मक विचारों,उनके प्रभावों और उनसे छुटकारा पाने के विषय में बताया गया है। आपसे अनुरोध है कि इस लेख को ध्यान से पढ़ें। उसके पश्चात् ही लेख में बताई गई प्रक्रिया को करें।ये मनुष्य का स्वभाव है कि वो पहले नकारात्मक ही सोचता है। उसके पश्चात् चाहे शीघ्र ही सकारात्मक विचार मन में आ जाये किन्तु पहले तो गलत विचार ही मन में प्रवेश करते हैं। उदाहरण के लिए यदि कोई व्यक्ति आज उस समय पर घर या ऑफिस नहीं पहुंचा, जिस समय पर रोज़ाना पहुँचता है। तो उसके साथी पहले कुछ नकारात्मक ही सोचेंगे। नकारात्मक विचार व्यक्ति के मन में पहले आते हैं।

नकारात्मक या सकारात्मक विचार 
ये नकारात्मक विचार सकारात्मक विचारों की अपेक्षा अधिक प्रभावी होते हैं। आपके मन पर या शरीर पर नकारात्मक विचारों का प्रभाव अधिक एवं जल्दी पड़ता है। जैसे यदि आप सोच में डूबे डूबे ये विचार करने लगे हैं कि आपका किसी के साथ बहुत झगड़ा हो रहा है तो आपका दिमाग गरम हो जायेगा। आप क्रोध से भर जाएंगे। आप सच में उसके साथ लड़ना चाहेंगे। किन्तु यदि आप ये सोचेंगे कि आपकी किसी के साथ सुलह हो गई है और आप उससे हाथ मिला रहे हैं। तो आप उस भावना को आसानी से अनुभव नहीं कर पाएंगे।

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ये समस्याएं 
इन नकारात्मक विचारों से अधिक घिरे रहने पर आपको मानसिक तनाव जैसी समस्याएं हो सकती हैं। आप सिरदर्द, गर्दन दर्द, कन्धों में दर्द जैसी कई बिमारियों से पीड़ित हो सकते हैं। आपके काम मात्र आपकी गलत सोच की वजह से बिगड़ सकते हैं। आपकी हर समय नकारात्मक सोचने की समस्या से आपके रिश्ते बिगड़ सकते हैं। बेहतर होगा कि आप अपनी इस समस्या से छुटकारा पा लें।

नकारात्मक विचार
इन नकारात्मक, बुरे विचारों से मुक्ति पाने के लिए आपने जो ध्यान करना है। उसे आप किसी भी स्थिति में कर सकते हैं, जैसे नीचे बैठ कर, कुर्सी पर बैठकर या लेट कर। आपको इस बात का ध्यान रखना है कि आपके आसपास का वातावरण जितना संभव हो सके शांत हो।

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अवश्य रखें ध्यान 
बताई गई ध्यान की प्रक्रिया को आपने आँखें बंद करके कल्पना में करना है। जहाँ जहाँ जो जो करने के लिए कहा गया है उसे आँखें बंद करके कल्पना करते रहें कि आप कर रहे हैं।

ध्यान विधि
कल्पना कीजिए कि आप अपने सभी अवांछित विचारों, भावनाओं और परिस्थितियों को इकट्ठा कर रहे हैं। इनमें आप इकठ्ठा करेंगे उन सभी नकारात्मक विचारों को, भावनाओं को और परिस्थितियां है, जो आपके आस पास आपको दुःख दे रही हैं। इन सबको इकठ्ठा करके कल्पना करें कि आप इन्हें बर्फ में फंसा कर एक बड़ी बॉल बना रहे हैं।

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इस बर्फ की गेंद को अपने हाथों से अच्छे से दबा दबा कर बनाएं। इस बर्फ की गेंद को ऐसे कस दें कि आपकी सभी नकारात्मकताएं इसमें अच्छे से फंस जाएं, गुंथ जाएं। अब कल्पना करें कि आपके सामने एक सुनहरी नदी बह रही है। अब धीरे से उठें (कल्पना में) और सांस अंदर खींचते हुए इस बर्फ की गेंद को उठा लें।

इस बर्फ की गेंद  को आराम से उछाल कर नदी में फेंक दें। अब सांस बाहर छोड़ते हुए इस गेंद को नदी के सुनहरे पानी में घुलते हुए देखें। सांस बाहर छोड़ते हुए गेंद को पानी में घुलते और अपने से दूर जाता देखें। पूरी सांस बाहर निकाल दें। अब धीरे धीरे सांस भीतर खींचते हुए शुद्ध पवित्र सुनहरी रौशनी को अपने भीतर आते हुए अनुभव करें। इसी प्रकार 3 बार गहरी सांस लें और आँखें खोल लें।