लग्नेष एवं सप्तमेष का 6, 8 या 12 भाव में हो तो आर्थिक कष्ट या धन संबंधित कमी से गृहस्थ जीवन बाधित होता है। 6, 8 या 12 भाव के स्वामी होकर सप्तम भाव से संबंध स्थापित होने पर वैवाहिक सुख में बाधा का कारण धन संबंधी विवाद बनता है। इसके अलावा लग्नेष या सप्तमेष का निर्बल होकर क्रूर स्थान या क्रूर ग्रहों के साथ होना भी वैवाहिक जीवन में दुख तथा कष्ट का कारण बनता है। द्वितीय, पंचम, सप्तम, अष्टम या द्वादष भाव पर क्रूर ग्रह का होना भी वैवाहिक जीवन में कष्ट का कारण घरेलू या आर्थिक कमी बनता है।
यदि किसी के जीवन में वैवाहिक कष्ट उत्पन्न हो रहा हो गजेंद्र मोक्ष को अपने आप में एक अद्भुत सतुति कहा जाता है। इसके प्रयोग से किसी भी प्रकार के कष्टनिवारण में आषातीत सफलता प्राप्त होती है। कलयुग में गजेंद्र मोक्ष की स्तुति हर प्रकार के सुख सौभाग्य हेतु तथा हर प्रकार के समस्याओं से मुक्ति में पूरी तरह से सफल है।
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