Home Articles Gems & Stones
Gems & Stones

जब गुरू दशम भाव में हो तो इसका प्रभाव…

जब गुरू दशम भाव में हो तो इसका प्रभाव…

जब गुरू दशम भाव में हो तो इसका प्रभाव…

दशम भाव में अगर गुरू हो तो पुखराज धारण करने से कामकाज में वृद्धि होती है,मान प्रतिष्ठा बढ़ती है,घरेलू सुख में वृद्धि होती है। आर्थिक स्थिति मजबुत है।

1.मेष लग्न –

गुरू नवमेश – द्वादशेश होकर दशम भाव में मकर राशि में स्थित होगा। पुखराज धारण करना इतना लाभकारी नहीं हैं। क्योंकि गुरू अपनी नीच राशि में होगा।

2.वृष लग्न –

गुरू अष्टमेश – लाभेश बनता है।पुखराज धारण करने से धन लाभ में वृद्धि होती है। विरासत में धन सम्पत्ति मिल सकती है।

ALSO READ  Ganesh Chaturthi 2026 Horoscope: What are Bappa bringing for the 12 zodiac signs?

3.मिथुन लग्न –

गुरू सप्तमेश – दशमेश होकर दशम भाव में मीन राशि में स्थित होगा। पुखराज धारण करने से कामकाज/नौकरी में तरक्की होगी। पति – पत्नी सुख भी मिलेगा।

4.कर्क लग्न –

गुरू षष्ठेश – भाग्येश होकर दशम भाव में स्थित होगा। पुखराज धारण करना लाभकारी रहेगा।

5.सिंह लग्न –

गुरू पंचमेश – अष्टमेश होकर दशम भाव में वृष राशि में स्थित होगा। पुखराज धारण करना इतना लाभकारी नहीं।शुभ – अशुभ मिश्रित फल प्राप्त होंगे।

6.कन्या लग्न –

गुरू चतुर्थेश – सप्तमेश होकर दशम भाव में मिथुन राशि में स्थित होगा। पुखराज धरण से मकान,वाहन सुख में वृद्धि होगी। पति – पत्नी सुख में भी बढ़ोत्तरी होगी।

आप इस लेख का आधा भाग पढ़ चुके हैं

आगे पढ़ने के लिए लॉगिन करें। खाता बनाना पूरी तरह निःशुल्क है – Google या मोबाइल OTP से, एक मिनट में।

लॉगिन करें और आगे पढ़ें नया यूज़र? निःशुल्क खाता बनाएँ

क्या आपके जीवन में कोई प्रश्न है?

अनुभवी ज्योतिषियों से कुंडली, विवाह, करियर और वास्तु पर व्यक्तिगत परामर्श लें।

अभी परामर्श लें