Home Articles Astrology
Astrology

फलित कैसे करें ?

फलित कैसे करें ?

फलित कैसे करें ?

एक ही ग्रह के आधार पर किया गया फलित सन्देह उत्पन्न करता है। और फलितज्ञ और भविष्य जानने वाले को धोखे में रखता है।प्राचीन ज्योतिष से बनी जन्मकुण्डली को लेकर उसके सभी राशि अंक हटा दें,परन्तु ग्रह जिस भाव में हैं,उन्हें वहीं रहने दें। बाद में इस कुण्डली में लग्न से द्वादश भाव 1 से 12 तक के अंक स्थापित कर दें,अब जो कुण्डली नए रूप में हमारे सम्मुख होगी,वही लाल किताब की कुडली है।

अब लाल किताब के फलित सिद्धान्तों को इस कुण्डली पर व्यवहार में लाकर जातक का भविष्य निर्धारित करें। एक या एक से अधिक ग्रहों की युति होने पर उन ग्रहों का अलग-अलग एवं मिश्रित फल समन्वय से देखेंगे क्योंकि कभी-कभी ग्रह अलग-अलग अशुभ फल देते हैं,परन्तु एक साथ बैठने पर अच्छा फल देते हैं।जैसे-बुध व मंगल ग्रह अलग-अलग आठवें भाव में स्थिम होें तो शुभ फल करते हैं,परन्तु एक साथ मंगल -बुध आठवें भाव में हों तो शुभ फल करते हैं।

ALSO READ  AstroShrine ऐप अब Google Play Store पर उपलब्ध – अब अपने फ़ोन से जुड़िए प्रमाणित वैदिक ज्योतिषियों से

एक या एक से अधिक ग्रहों की युति का फल,एक साथ स्थित होने का फल एवं अलग-अलग जो फल हो उन्हें देखकर समन्वय युक्त फल कहें,अपने मन से फल न कहें।यह मान लें कि प्रत्येक भाव एक घर है। और उस घर के अनुसार ही उस घर के गुण-अवगुण होंगे। इसके अतिरिक्त उस घर पर जिस ग्रह का कारक प्रभाव है उसका भी पूर्ण प्रभाव प्रभाव होगा। इन दोनों ग्रहों की परस्पर मित्रता-शत्रुता भी उस भाव के फल पर डालती है।

आप इस लेख का आधा भाग पढ़ चुके हैं

आगे पढ़ने के लिए लॉगिन करें। खाता बनाना पूरी तरह निःशुल्क है – Google या मोबाइल OTP से, एक मिनट में।

लॉगिन करें और आगे पढ़ें नया यूज़र? निःशुल्क खाता बनाएँ

क्या आपके जीवन में कोई प्रश्न है?

अनुभवी ज्योतिषियों से कुंडली, विवाह, करियर और वास्तु पर व्यक्तिगत परामर्श लें।

अभी परामर्श लें