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आखिर कैसे बनता है किसी कुंडली में पितृ दोष ? जानें इससे मुक्ति के आसान उपाय!

आखिर कैसे बनता है किसी कुंडली में पितृ दोष ? जानें इससे मुक्ति के आसान उपाय!

वैदिक ज्योतिष में इसे पिता का कारक कहा गया है तो राहु और शनि जब सूर्य को प्रभावित करते है तो ‘पितृ दोष’ का निर्माण होता है। इस दोष में शर्त यह है कि सूर्य राहु से युति होना चाहिए और उस पर शनि की दृष्टि होनी चाहिए।

 

पितृ दोष के उपाय

 

  • ज्योतिष शास्त्र के अनुसार पितृ दोष से मुक्ति पाने के लिए पितृ पक्ष में पूर्वजों के निमित्त विधि विधान से पिंडदान, तर्पण और श्राद्ध कर्म किए जाते हैं.
  • पितृ पक्ष में ब्राह्मण को भोजन कराए जाते हैं और उन्हें दान दिया जाता है. इसके साथ ही साल की हर एकादशी, चतुर्दशी, अमावस्या पर पितरों को जल अर्पित किया जाता है. इसके अलावा त्रिपंडी श्राद्ध भी किए जाते हैं.
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  • पितृ पक्ष में पितृ दोष शांति के लिए रोजाना दोपहर के समय पीपल की पूजा की जाती है. साथ ही पितरों को प्रसन्न करने के लिए पीपल में गंगाजल में काले तिल, दूध, अक्षत और फूल मिलाकर अर्पित किया जाता है.

 

  • पितृ पक्ष के दौरान रोजाना घर में शाम के समय दक्षिण दिशा में तेल का दीपक लगाएं. माना जाता है कि ऐसा करने से पितृ दोष खत्म हो जाता है.

 

  • पितृ पक्ष के दौरान किसी जरुरतमंद को भोजन कराएं. साथ ही उन्हें दान दें. इसके अलावा किसी गरीब कन्या के विवाह में मदद कर सकते हैं. माना जाता है कि ऐसा करने से पितृ देव प्रसन्न होते हैं. जिससे पितृ दोष शांत होता है.
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अगर किसी जातक की कुंडली में ऊपर दी गई ग्रह स्थिति बन रही है तो उसे पितृ पक्ष में किसी विद्वान आचार्य से इस दोष की शांति करवानी चाहिए। अगर किसी की कुंडली नहीं है तो भी विद्वानों ने पितृ दोष के कुछ लक्षण कहे है।

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