1. यदि अशुभ राहु लग्न भाव में हो और कालसर्प योग बनता हो तो –
लोहे की गोली लाल रंग में रंगकर अपने पास रखें।बिल्ली की जेर को घर में रखें या गले में बाॅधें।काले या नीले रंग के कपड़े न पहनें।बीमारी के समय 400 ग्राम सिक्का (राॅगा) बहते पानी में बहाएँ ।
2. यदि अशुभ राहु द्वितीय भाव में स्थित हो व कालसर्प योग बनता हो तो –
हाथी (राहु का कारक) के पाॅव की मिट्टी कुएँ में डालें।चाॅदी की ठोस गोली अपने पास रखें। (दूसरी राशि में चन्द्रमा उच्च होता है।)
हाथी दाॅत की वस्तुएँ मंदिर, धर्मस्थान में दान न दें।ससुराल (तीसरा भाव) की भी आर्थिक हालात ठीक न हो (द्वितीय भाव तीसरे भाव का व्यय भाव है) तो ससुराल से राहु की चीजें जैसे बिजली का सामान न लें।माथे पर हल्दी और केसर का तिलक लगायें।घर की उत्तर-पश्चिमदिशा में पानी या चाॅदी रखें।बृहस्पति की वस्तुओं का प्रयोग करें।माता की सेवा करें।
3. यदि अशुभ राहु तृतीय भाव में स्थित हो व कालसर्प योग बनता हो तो –
मंगल कारक ग्रह है मंगल को बलवान करें।चन्द्रमा के उपाय करें, चन्द्र मंगल का मित्र है।हाथी दाॅत घर में न रखें।घर में जानवर व पशु न पालें।झूठ न बोलें व झूठी गवाही न दें।सरसों, तम्बाकू का दान करें।सूर्योदय के बाद पक्षियों को बाजरा व जौ खिलाएँ।परिवार से अलग न रहें।
4. यदि अशुभ राहु चतुर्थ भाव में स्थित हो व कालसर्प योग बनता हो तो –
चाॅदी की अंगूठी पहनें।400 ग्राम धनिया पानी में बहाएँ।कोई भी शुरू किया हुआ काम अधूरा न छोड़ें।घर में अंधेरा या गंदा पानी न रहने दें।सीढ़ियों के नीचे रसोई न बनाएँ। मकान की छत पर कोयले न रखें।गंगा-स्नान करें।मकान के पाखाने की जगह न बदलें। रोग की स्थिति में 400 ग्राम साबुत बादाम बहते पानी में बहायें।
5. यदि अशुभ राहु पंचम भाव में स्थित हो व कालसर्प योग बन रहा हो तो-
यदि पंचम भाव में राहु का फल गंदा हो तो दुकान या मकान की चैखट में चाॅदी की ईट या पतरा गाड़ना चाहिए।पत्नी के सिरहाने रात में 5मूलियाॅ रखें। सुबह ये मूलियाॅ मंदिर में दे दें।परायी स्त्री से दूर रहें।चाॅदी का ठोस हाथी घर में रखें। अंधविद्यालय में दान दें व सेवा करें।अपनी पत्नी के साथ सम्पूर्ण विवाह पद्धति से पुनर्विवाह करे।तीसरा विवाह कभी न करें।
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