
ज्योतिष शास्त्र में षष्ठम, अष्टम, द्वादश स्थान एवं मंगल ग्रह को कर्ज का कारक ग्रह माना जाता है। मंगल के कमजोर होने पर या पाप ग्रह से संबंधित होने पर, अष्टम, द्वादश, षष्ठम स्थान पर नीच या अस्त स्थिति में होने पर व्यक्ति सदैव ऋणी बना रहता है।
ओम आं ह्रीं क्रौं श्रीं श्रियै नमः ममालक्ष्मीं नाशय ममृणोत्तीर्णं कुरु कुरु संपदं वर्धय स्वाहा मंत्र का जाप करने से कर्ज से मुक्ति मिल जाती है। 44 दिनों तक 10,000 बार इस मंत्र से जाप करने से धन का लाभ जीवन में होता है साथ ही इंसान को अपने कर्ज से मुक्ति दिलाने में भी सहायक होता है।
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