पितृ पक्ष की अवधि आश्विन कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा की तिथि से अमावस्या तक होती है। हिंदू धर्म में इस 16 दिन अवधि को बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। पितृ पक्ष की शुरुआत 13 सितंबर से हो चुकी है, जो कि 28 सितंबर तक समाप्त होंगे। पितरों की आत्मा की शांति के लिए 16 दिनों के श्राद्ध कर्म किये जाते हैं।
पुराणों के अनुसार श्राद्ध पक्ष में पितरों की आत्मा की शांति और मुक्ति के लिए पिंडदान किया जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, पितृ पक्ष यानी श्राद्ध के दौरान तक कौओं को काफी सम्मान के साथ देखा जाता है। माना जाता है कि कौवा दिखना पूर्वज का प्रतीक है और पितृ पक्ष के दौरान अगर कौवा दिखता है तो उसे मेहमान के रूप में देखा जाता है।
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