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रोगों से ग्रहों का संबंध, ज्योतिष्य रहस्य

रोगों से ग्रहों का संबंध, ज्योतिष्य रहस्य

जन्मपत्री में स्थित ग्रहों की स्थिति जन्म समय के समय भचक्र में स्थित ग्रहों और नक्षत्रों का फोटो कहा जा सकता है। जन्म के साथ ही जन्मपत्री में ग्रहों की स्थिति निर्धारित हो जाती हैं। इसके साथ ही यह भी तय हो जाता है कि जातक के जीवन की आने वाली घटनाएं किस प्रकार की रहेंगी। उसका स्वास्थ्य कैसा रहेगा और जीवन में किस प्रकार के उतार-चढ़ाव आयेंगे।

ज्योतिष शास्त्र के अंतर्गत ही ज्योतिष की एक शाखा चिकित्सा ज्योतिष शास्त्र है। इस शाखा में जन्मकुंडली से रोग, स्वास्थ्य और आयु का विचार किया जाता है। ज्योतिष शास्त्र यह कहता है कि व्यक्ति को रोग पूर्वजन्मों के कर्मों के आधार पर प्राप्त होते हैं।

कुंडली में यदि ग्रह सुस्थित ना हों तो व्यक्ति को कोई ना कोई रोग लगा रहता है। इस स्थिति में ज्योतिषीय उपायों का सहारा लिया जाता हैं। आईये जाने कि कौन से रोग किस ग्रह के कारण जन्म लेते हैं-

  • जन्मपत्री में चंद्र की स्थिति प्रतिकूल हों तो व्यक्ति का मन स्थिर नहीं रहता है। उसे मानसिक रोग अधिक कष्ट दे सकते हैं। इसके अतिरिक्त यदि चंद्र और राहु एक साथ हों तो व्यक्ति के मन में कोई न कोई भ्रम बना रहता है। व्यक्ति किसी पर जल्द विश्वास नहीं करता है।
  • चतुर्थ भाव पर बुध और केतु का होना, ह्रदय से जुड़े रोग देता है। चतुर्थ भाव पर राहु की स्थिति भी ह्रदय संबंधी कष्ट की स्थिति देता है।
  • जन्मपत्री में लग्नेश का कमजोर होना स्वास्थ्य में कमी देता है। इसके अलावा यदि लग्नेश छ्ठे, आठवें या बारहवें भाव में हों तो व्यक्ति को जीवन में कोई न कोई रोग लगा ही रहता है।
  • गुरु लग्न में स्थित हों तो व्यक्ति के रोगग्रस्त होने की स्थिति कम ही बनती है। यहां ध्यान देने योग्य बात यह है कि गुरु अगर वक्री अवस्था में हों तो व्यक्ति के स्वास्थ्य में उतार-चढ़ाव बना रहता है।
  • मंगल सप्तम भाव में होने पर और चंद्र पीडित हो तो व्यक्ति मानसिक आघात लगने की संभावना बनती है।
  • यदि कुंडली में शनि लग्न भाव या पंचम भाव अथवा सप्तम भाव में हो तो व्यक्ति निराशा भाव में जल्द आता है।
  • जिस कुंडली में चंद्र कमजोर हो और बारहवें भाव में १२वें भाव में शनि के साथ हों तो मानसिक स्थिति कमजोर रहती है। ऐसा बालक जल्द तनाव लेता है।
  • जन्म लग्न में शनि कमजोर हों, सूर्य १२वें भाव में, मंगल तथा चंद्रमा अष्टम भाव में हों तो मानसिक रोग की संभावनाएं बनती है।
  • राहु और चंद्रमा का एक साथ लग्न भाव में होना भी मानसिक रोग होने के संयोग बनाता है।
  • जन्मपत्री का छ्ठा, आठवां और बारहवां भाव बली अवस्था में हों तो जातक का स्वास्थ्य कमजोर ही रहता है।
  • चंद्रमा के साथ केतु और शनि की युति हों तो व्यक्ति मानसिक रोग होता है।
  • शनि और मंगल का एक साथ छ्ठे भाव अथवा आठवें भाव में होना स्वास्थ्य में खराबी का कारण बनता है।

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