जानें किस तरह हुई थी करवा चौथ व्रत की शुरुआत…
साधारण बोलचाल के भाषा में इसे करवा चैथ के नाम से भी जाना जाता है । यह व्रत कार्तिक कृष्ण चतुर्थी को किया जाता है। इस दिन व्र्रत करने वाली स्त्रियाँ पूरा दिन निर्जल निराहार रहती है।शाम को फिर से स्नानकर वे सुन्दर सुन्दर आभूषण और नए वस्त्र पहनकर तैयार होती हैं। चन्द्रमा को अघ्र्य दिया जाता है। इसके पश्चात् फूल, अक्षत से पूजा कर आरती की जाती है।
उस दिन स्त्रियाँ छलनी से पहले चन्द्रमा का दर्शन करती हैं और फिर उसी छलनी से अपने पति का चेहरा देखती हैं। इसके पश्चात् से पति के हाथों करवे से पानी पीती हैं । इसके पश्चात् से पति के हाथों करवे से पानी पीती हैं और पति का आशीर्वाद लेती हैं। करवा चैथ की कथा इस प्रकार है-
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