नववर्ष का आगमन अब कुछ दिनों के बाद ही होने वाला है। हर किसी को नववर्ष का इंतजार बेसब्री से है। यह वर्ष कैसा बीता उसे याद करते हुए नए वर्ष को एक नई उम्मीद से देखते हैं। हर कोई जानना चाहता है कि नव वर्ष में उसकी किस्मत के तारे क्या कहते हैं? पिछले साल की तरह ही जीवन चुनौतियों से भरा होगा या जो सफलताएं और खुशियां मिली हैं, वह सिलसिला नए साल में भी चलेगा? नए साल में कार्य योजनाएं सफल होंगी? रिश्ते बेहतर रहेंगे? नौकरी या बिजनेस अच्छा चलेगा? ऐसे कई सवाल मन में आने लगते हैं। ऐसे में हम आपको बताने जा रहे हैं कि नववर्ष 2020 का वार्षिक राशिफल, जिसमें आपके सवालों के जवाब मिल सकेंगे।
वार्षिक राशिफल 2020
वर्ष 2020 का यह राशिफल पूर्णतः गोचर-ग्रहों पर आधारित है। शास्त्रों में ग्रहों के विभिन्न राशिगत एवं भावगत गोचर के आधार पर जो फल कहे गए हैं, उनका इस राशिफल को तैयार करने में अनुसरण किया गया है। व्यक्ति विशेष के लिए घटित घटनाएं गोचरगत ग्रहों के फलों के अलावा अन्य तथ्यों से भी प्रभावित होते हैं।
इन तथ्यों में प्रमुख है:- उनकी विद्यमान दशा अंतरदशा, प्रत्यन्तर दशा, वर्ष कुंडली एवं जन्म कुंडली में ग्रहों की स्थिति आदि। अतः प्रस्तुत राशिफल इन सीमाओं को ध्यान में रखते हुए देखा जाना चाहिए। राशिफल ग्रहों की स्थितियों के आधार पर मात्र पूर्वाकलन और मार्गदर्शन है, भविष्यवाणी नहीं है, इसे उसी दृष्टि से देखना चाहिए।
वृष राशि:-(ई,उ,ऐ, ओ,वा,वि,वू,वे,वो)
वृष राशि के जातकों के लिए नववर्ष 2020 का प्रारंभ कुछ मन अनुकूल नहीं होगा। नववर्ष के प्रारंभ से 23 जनवरी तक वृष राशि पर शनि की ढैया रहेगी तथा 7 फरवरी तक मंगल की दृष्टि पड़ रही है। ऐसी स्थिति में आपको अधिक संघर्ष करना होगा। इस समय में आपके कार्यों में विध्न-बाधाएं आएंगी, और इन सबके कारण आपको मानसिक तनाव भी रहेगा।
हालांकि 03 फरवरी से आपके अनुकूल समय बनना प्रारंभ होगा। 3 फरवरी से 28 फरवरी तक राशि स्वामी शुक्र उच्च राशिस्थ रहेगा। इस कारण से आपके लिए धन लाभ का योग बन रहा है। इसके साथ ही आपको उन्नति के अवसर भी प्राप्त होंगे।
आपको धैर्य से काम लेने की जरूरत पड़ेगी। 23 सितंबर से वर्ष के अंत तक वृष राशि पर राहु का संचार होगा। इस वजह से आपके बनते कार्यों में भी बाधाएं आएंगी, उन कामों में विलंब होगा। तीन माह से अधिक का समय आपके लिए चुनौतियों भरा रहेगा। आपको सूझबूझ से काम करना होगा।
उपाय: प्रत्येक शुक्रवार के दिन आन कुंवारी कन्याओं का विधि विधान से पूजन करें और उनको खीर का भोग लगाकर खिलाएं।
शुभ रंग: क्रीम, हरा, आसमानी और काला।
शुभ अंक: 5, 6 और 8।
शुभ देवता: श्री गणेश, मां लक्ष्मी एवं हनुमानजी।
शुभ व्रत: शुक्रवार और पंचमी तिथि।