धनु राशि 24 नवम्बर से प्रारम्भ होती है। सात दिन तक पूर्व राशि वृश्चिक के साथ इसका संधिकाल चलता है जिससे यह 28दिसंबर को ही पूर्ण प्रभाव में आ पाती हैं। इसके बाद 20 दिसम्बर तक इसका पूरा प्रभाव रहता है। उसके बाद आगामी राशि मकर के साथ सवि-काल प्रारम्भ हो जाने से सात दिन तक इसके प्रभाव से उत्तरोत्तर कमी होती जाती है। इस अवधि में, अर्थात् 24 नवम्बर से 20-27 दिसम्बर तक पैदा होने वाले व्यक्तियोंमें इस राशि के प्रतीक घनुर्धारी के गुण मिलते हैं। वे अपने काम में सीधा लक्ष्यबेघ करते है। वे स्पष्ट बोलने वाले और मुँह फट होते हैं जिससे प्राय जानी दुश्मन पाल लेते हैं। वे अपना सारा ध्यान उस क्षण कर रहे काम पर केद्रित रखते हैं और जब तक पूरे प्रयास कर थक नहीं जाते, किसी दूसरी ओर निगाह भी नहीं करते हैं।उनके मस्तिष्क में इतनी शीघ्रता से विचार कौंधते है कि वे प्राय दूसरों के वार्तालाप मेंबीच में टपक पड़ते हैं और धीरे या रुककर बोलने वालों के प्रति अधीरता प्रकट करते हैं। एकदम सत्यवादी होने से वे दूसरों को छलने के प्रवासी का भंडाफोड़ कर देते हैं, भले ही उनका यह कार्य अपने हितों के विरुद्ध हो। वे अपने काम में तब तक विश्राम नहीं लेते जब तक थककर चूर चूर नहीं हो जाते अथवा काम करते हुए मृत्यु को प्राप्त नहीं हो जाते। व्यापार या अन्य किसी कार्य में वे भारी उद्यनी होते हैं लेकिन अपने को कभी एक कामसे बँधा महसूस नहीं करते। अत: वे तेजी से अपने बिचार बदलते रहते हैं। राजनीतिज्ञ केरूप वे अपनी नीतियों में अनेक बार परिवर्तन करेंगे। धर्म प्रचारक के रूप में वे घर्म के बारे में अपने विचार बदल सकते हैं। वैज्ञानिक प्राय: अपना धंधा छोडक़र किसी उद्योग को अपना सकते हैं। उनसे अति तक जाने की प्रवृत्ति होती है। तत्काल निर्णय ले लेते हैं जिसके लिए बाद में पछता भी सकते हैं, लेकिन अभिमानी इतने होते हैं कि अपनी गलतियों को स्वीकार नहीं करते। अधिकार से प्रेम उनका प्रमुख गुण होता हैं। यदि वे महसूस करे कि अपना लक्ष्य प्राप्त नहीं कर सकते तो बीच में ही रुक जाते है। अपनी महत्वाकांक्षा को तिलांजलि दे एकदम नया काम शुरू कर देते हैं अथवा फिर जीवन भर कुछ नहीं करते। इस राशि के नर-नारी प्राय भावुकता के क्षण में विवाह करते हैं और फिर बाद में पछताते हैं। लेकिन अभिमान के कारण अपनी गलती स्वीकार नहीं करते और लोग प्राय: उनके वैवाहिक सुख को आदर्श समझ बैठते हैं। वे कानून और व्यवस्था के पक्के समर्थक होते हैं। पूजा-स्थल पर नियमित रूप से जाते हैं, दूसरों के लाभ के लिए अपना उदाहरण प्रस्तुत करने के दिवार से अधिक, स्वय धार्मिक वृति के होने के कारण कम वे प्राय: भारी लोकप्रियता प्राप्त करते हैं, ‘‘जन आदर्श’’ बन जाते हैं और उन पर यश तथा पद थोप दिए जाते हैं। इस राशि में महिलाएँ पुरुषों से अधिक उदत्त होती है। अपने पति और बच्चे की सफलता के लिए जितना कर सकती हैं, करती हैं और आत्म-त्याग को तैयार रहती हैं। घर से उन्हें गहरा प्रेम होता है तथा विवाह सुखी न होने पर भी वे इस आटे के सौदे सेअधिक-से-अधिक लाभ प्राप्त करने का प्रयास करती हैं। उनमें सम्मान और कर्तव्य के प्रति ऊँची समझ होती है, लेकिन जीवन के प्रति उनका दृष्टिकोण बहुत स्वतन्त्र होता है। इस अवधि में जन्मे लोग स्नायुओं के तीव्र रोगों से पीडित हो सकते हैं। आयु बढऩे परवे टाँगों के दर्द से परेशान हो सकते हैं। यदि महीने के उत्तरार्द्ध से पैदा हुए हो तो पावों केकिसी पक्षाघात के भी शिकार हो सकते हैं। नाक का रोग भी हो सकता है। जन्म-काल पर धनु में सूर्य की स्थिति से स्वभाव पर गुरु का जो प्रभाव पड़ता है वह प्रवृत्ति को कुछ दुरंगी बनाता है। ये लोग एक पल में संवेदनशील, दूसरों के बहकावे में आने वाले और शान्त हो सकते हैं, दूसरे ही क्षण वे पूर्ण, आवेशों और दुस्साहसी हो सकते हैं। सत्य, शांति और न्याय के पक्षधर होने के कारण उनका सच्चा धंधा पीडितों की सेवाहै। सताये हुए और दबाए हुए लोगों के साथ उनकी प्रबल सहानुभूति होती है। कभी-न-कभी वे किसी मानवीय या सुधार कार्य में अपना अच्छा देते हैं। उनमें परिहास की गहरी समझ होती है और तर्क करना पसन्द करते हैं। वस्तुत: वे मित्रों में वादविवाद की असाधारण कुशलता के लिए जाने जाते हैं। खुली हवा और घर से बाहर आमोद-प्रमोद के शौकीन होने के कारण वे जंगली, ऊबड़-खाबड़ पर्वतीय प्रदेश की खोज करते या यहाँ विचरण करते अपने स्वाभाविक रूप में होते हैं। वे स्पष्ट खुले दिलवाले और बहुत उदार होते हैं। उनका व्यवहार आम तौर पर विनम्र होता है लेकिन जब अपनी पर उतर आएं तो रूखे और उग्र हो जाते हैं। उनमें उच्चकोटि का पूर्वज्ञान रहता है और गुप्त ज्ञान तथा मन विषयक मामलों में अभिरुचि प्रदर्शित करते हैं।
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