शनि की साढ़ेसाती क्या होती है? जानिए इसके तीन चरण
वैदिक ज्योतिष में **शनि की साढ़ेसाती** का विशेष महत्व माना जाता है। साढ़ेसाती का नाम सुनते ही कई लोगों के मन में चिंता पैदा हो जाती है, लेकिन ज्योतिषीय दृष्टि से इसे केवल अशुभ अवधि मानना सही नहीं है। शनि को कर्म, अनुशासन, मेहनत और न्याय से जोड़कर देखा जाता है।
## शनि की साढ़ेसाती क्या होती है?
जब गोचर में शनि ग्रह व्यक्ति की **जन्म चंद्र राशि से एक राशि पहले, चंद्र राशि में और उसके बाद वाली राशि** से होकर गुजरता है, तो इस पूरी अवधि को साढ़ेसाती कहा जाता है।
शनि को प्रत्येक राशि से गुजरने में लगभग ढाई वर्ष लगते हैं। तीन राशियों से गुजरने के कारण यह अवधि लगभग साढ़े सात वर्ष की होती है।
## साढ़ेसाती के तीन चरण
### पहला चरण
पहले चरण में शनि चंद्र राशि से एक राशि पहले गोचर करता है। ज्योतिषीय मान्यताओं में इस चरण को मानसिक चिंता, खर्च, स्थान परिवर्तन और भविष्य को लेकर असमंजस जैसे विषयों से जोड़ा जाता है।
### दूसरा चरण
दूसरे चरण में शनि जन्म चंद्र राशि से होकर गुजरता है। इसे साढ़ेसाती का मध्य चरण माना जाता है। इस दौरान जिम्मेदारियां, मेहनत और जीवन में महत्वपूर्ण बदलाव जैसे विषयों का ज्योतिषीय अध्ययन किया जाता है।
### तीसरा चरण
तीसरे चरण में शनि चंद्र राशि से अगली राशि में प्रवेश करता है। इसे साढ़ेसाती का अंतिम चरण माना जाता है। इस समय व्यक्ति अपने पिछले प्रयासों और अनुभवों के आधार पर आगे बढ़ने की दिशा में काम कर सकता है।
You have read half of this article
Log in to keep reading. Creating an account is completely free – with Google or mobile OTP, in a minute.
Log in & read more New here? Create a free accountLog in to read more
You have read 50% of this article for free. Log in once to read the rest – and every astrology, Vastu and horoscope article on Future For You.
- Completely free – no charges
- One click with Google, or mobile OTP
- Straight back to this article after login