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भाषा शैली और ज्योतिष –

भाषा शैली और ज्योतिष –
जीवन में किसी व्यक्ति की पहचान उसकी आवाज होती है। कोई व्यक्ति किस प्रकार के जबान से पहचाना जायेगा और उसका लोग आदर करेंगे, उसे बात करना पसंद करेंगे या उससे बचते हुए रहना चाहेंगे यह सब कुछ ज्योतिषीय ग्रहों की गणना का विषय है। उसके सभी रिश्ते और अपनापन उसके जुबान के द्वारा बनती और बिगड़ती हैं वहीं यदि हम ज्योतिषीय नजरिये से देखें तो किसी की कुंडली में उसका यही काम उसका तीसरा स्थान या तीसरे स्थान का स्वामी करता है। अतः यदि किसी जातक को लगातर उसके जुबान के कारण अपमानित होना पड़ रहा हो अथवा उसके जुबान या भाषाशैली के कारण उसके रिश्तों में कटुता आ रही हो या रिश्ते खराब हो रहे हों तो ऐेसे व्यक्ति को अपनी कुंडली के तीसरे स्थान का विवेचन कर उससे संबंधित ग्रहों की शांति, मंत्रजाप अथवा उस ग्रह से संबंधित वस्तुओं के दान एवं उस ग्रह के अनुकूल व्यवहार रखकर अपना तीसरा घर सुधारने का प्रयास करना चाहिए और अपने बिगड़ कार्य या बिगड़े रिश्तों में मधुरता लाना चाहिए।

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