क्या आपकी जीवन मे आ रही परेशानियों से हलाकान हैं ?
हमारा जीवन, भाग्य और नियति जीवन, भाग्य और भाग्य हमारे पूर्वजों की विरासत से जुड़े हुए हैं। और यह उनके अच्छे कर्मों का फल है कि हमें सुरक्षा, सुरक्षा, शांति और समृद्धि का आशीर्वाद मिला है।
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लेकिन कभी-कभी हमें उनके बुरे कर्मों की भी परीक्षा लेनी पड़ती है। हर महीने पड़ने वाली अमावस्या तिथि के अलावा पितृ पक्ष के 15 दिन पितरों को ही समर्पित किए गए हैं।
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इस समय में पितरों की आत्मा की शांति के लिए और पितरों का आशीर्वाद पाने के लिए श्राद्ध, तर्पण, पिंडदान, दान-पुण्य आदि करना चाहिए। कुंडली में पितृ दोष का होना कई समस्याएं देता है इसलिए ज्योतिष में पितृ दोष निवारण के उपायों की सलाह दी जाती है।
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आइए जानते हैं पितरों दोष के लक्षण और इसके उपायों के बारे में।
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पितृ दोष के लक्षण
- लगातार बीमार रहने से व्यक्ति को आर्थिक और शारीरिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
- किसी भी कार्य में सफलता नहीं मिल पाती; उसमें मानसिक शांति और स्थिरता की कमी होने लगती है।
- व्यक्तिगत और सामाजिक जीवन में प्रतिकूल वातावरण और छोटी-छोटी बातों पर बहस।
- कई बार कुंडली में पितृ दोष होने पर हमारी शादी सही समय पर नहीं हो पाती है जिससे शादी में देरी होती है।
- पितृ दोष वाले बच्चों को बाद में या जन्म से ही शारीरिक या मानसिक विकलांगता का सामना करना पड़ सकता है।
- इससे गर्भधारण के दौरान गर्भपात हो सकता है।
- पितृ दोष सफल वैवाहिक जीवन को बाधित करता है।
- परिवार के भीतर आत्महत्या, हत्या, दुर्घटना जैसी अप्राकृतिक मौतें।
- एक ही परिवार में लगातार रहस्यमय ढंग से जानों की हानि।
- परिवार में किसी शुभ कार्यक्रम के आयोजन में लंबे समय तक रुकावटें आएंगी।
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