जानें इन दिनों में भूल कर भी न तोड़े बेलपत्र ……
हिन्दू धर्म के अनुसार कुछ ऐसे फूल और पत्तियां हैं जो ईश्वरीय पूजा में विशेष रूप से इस्तेमाल में लाई जाती हैं। यही नहीं ऐसा भी कहा जा सकता है कि पूजा के दौरान इन पत्तियों और फूलों का इस्तेमाल न करने से पूजा पूर्ण नहीं मानी जाती है। ऐसी ही पत्तियों में से एक है बेलपत्र या बिल्व पत्र। ऐसा माना जाता है कि मुख्य रूप से भगवान शिव की पूजा के दौरान बेल पत्रों का इस्तेमाल जरूर किया जाता है। भगवान शिव को ऐसी पूजा स्वीकार्य नहीं होती है जिसमें बेल के पत्तों का इस्तेमाल न किया गया हो। ऐसा कहा जाता है कि किसी भी तरह के शिव पूजन और व्रत के दौरान बेल पत्र का इस्तेमाल जरूर करना चाहिए।
इन तिथियों में भूल से न तोड़ें बेलपत्र
पुराणों के अनुसार बेलपत्र को कभी भी सोमवार, चतुर्थी, अष्टमी, नवमी, द्वादशी, चतुर्दशी, अमावस्या, पूर्णिमा, संक्रांति आदि शुभ दिनों पर नहीं तोड़ना चाहिए। साथ ही दोपहर के बाद भी इसके पेड़ को हाथ लगाने से बचना चाहिए। ऐसा करने से भगवान शिव नाराजगी का सामना करना पड़ सकता हैं। असल में बेलपत्र के अनुसार ये दिन शिव जी को अति प्रिय होने से इन दिनों बेलपत्र को तोड़ने से बचना चाहिए।
इस दिन न तोड़े बेलपत्र
शिव पुराण के अनुसार, बेलपत्र उस दिन नहीं तोड़ना चाहिए जिस दिन भगवान शिव को समर्पित दिन होता है। इसलिए सावन सोमवार के दिन बेलपत्र तोड़ने के बजाय एक दिन पहले यानी रविवार के दिन ही बेलपत्र तोड़ लें तो अच्छा है। इसके अलावा महाशिवरात्रि, हर मास की चतुर्दशी तिथि को भी बेलपत्र तोड़ने की मनाही है।
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