माथे में लगाए तिलक चमक जायेगा किस्मत…
धर्म, शास्त्र कहते है कि तिलक के बिना कोई भी सत्कर्म सफल नहीं हो पाता, मिट्टी, चन्दन एवं भस्म आदि के तिलक को विद्वान या अन्य किसी के द्वारा लगाना चाहिए। माथे पर तिलक बैठकर ही लगाना या लगवाना चाहिये। लेकिन भगवान पर चढ़ाने के बाद बचे हुए चन्दन को ही अपने माथे पर लगाना चाहिये। शास्त्र कहते हैं कि जो व्यक्ति प्रतिदिन अपने माथे पर तिलक लगाते हैं उनकी बुद्धि प्रखर व विवेकावान होने के साथ उनकी सभी कामनाओं की पूर्ति होने लगती है।
हमारे शरीर में ऊर्जा के 7 छोटे-छोटे केंद्र हैं जिन्हें चक्र कहा जाता है और ये चक्र अपार शक्ति के भंडार हैं. तिलक या टीके को माथे के बीचों बीच लगाने के पीछे कारण ये है कि वहां पर आज्ञा चक्र होता है. हमारे शरीर के 7 चक्रों में से यह सबसे महत्वपूर्ण स्थान है. आज्ञा चक्र स्पष्टता और बुद्धि का केन्द्र है. यहां पर शरीर की 3 प्रमुख नाड़ियां- इडा (चंद्र नाड़ी), पिंगला (सूर्य नाड़ी) और सुषुम्ना (केन्द्रीय, मध्य नाड़ी) आकर मिलती हैं. आज्ञाचक्र को गुरुचक्र भी कहा जाता है क्योंकि यहीं से पूरे शरीर का संचालन होता है. यह हमारे शरीर का केंद्र स्थान है.
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