Mantra jaap :जानें मंत्र जाप करने का सही तरीका ,और नियमों
Mantra Jaap: मंत्र उच्चारण के बिना पूजा अधूरी ही है, मंत्रों को बहुत महत्व दिया जाता है. शास्त्रों और धर्म के अनुसार मंत्रों में बहुत शक्ति होती है. कोई भी मंत्र उच्चारण यदि सही ढंग और सही तरीके से किया जाए तो उसका प्रभाव पूरे ब्रह्मांड में सकारात्मक ही पड़ता है, मंत्र उच्चारण अपने आस-पास सकारात्मक प्रभाव का संचार करता है. माना जाता है कि हर एक मंत्र से अलग-अलग तरह का प्रभाव और शक्ति उत्पन्न होती है. मंत्रों की शक्ति से व्यक्ति अपने जीवन को बदल सकता है. मंत्र के जाप से मानसिक शांति भी मिलती है. हिंदू धर्म में कोई भी शुभ कार्य बिना मंत्रों के नहीं किया जाता.
Vidhi: भगवान की पूजा करते समय हम सभी धूप-आरती तो करते ही हैं साथ ही मंत्रों का जाप भी करते हैं। जिस तरह हम भगवान के दर्शन करते समय अपना सिर उनके सामने झुकाते हैं ठीक उसी तरह हमें मंत्रों का जाप करते समय भी कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए। अगर मंत्रों का जाप करते समय भगवान के समक्ष बैठकर हम विधिपूर्वक जाप नहीं करते हैं तो उससे मंत्रों का प्रभाव कम हो जाता है। ऐसे में आपको जाप करना हो तो निम्न ढंग से कर सकते हैं।
मंत्र जाप करते समय इन नियमों का रखें ध्यान-
- मंत्र जाप से पहले शुद्धि आवश्यक है इसलिए दैनिक क्रिया से निवृत्त होने और स्नानादि करने के पश्चात ही जाप करना चाहिए।
- जाप के स्थान को भी भलिभांति साफ कर लेना चाहिए और एक स्वच्छ आसन पर बैठकर ही जाप करना चाहिए।
- जाप के बाद आसन को इधर-उधर नहीं छोड़ना चाहिए और न ही पैर से हटाना चाहिए। आसन को एक जगह संभाल कर रख देना चाहिए।
- मंत्र जाप के लिए कुश का आसन उत्तम माना जाता है, क्योंकि कुश ऊष्मा का सुचालक है,जिससे मंत्र जाप करते समय ऊर्जा हमारे शरीर में समाहित होती है।
- साधारण रूप से जाप करने के लिए तुलसी की माला उत्तम रहती है लेकिन यदि किसी कार्य सिद्धि के लिए जाप किया जाए तो उक्त देवी-देवता के अनुसार ही माला लेनी चाहिए। जैसे भगवान शिव के लिए रुद्राक्ष तो लक्ष्मी जी के लिए स्फटिक या कमलगट्टे की माला श्रेष्ठ मानी जाती है।
- मंत्र जाप करने के लिए एक शांत स्थान को चुनना चाहिए ताकि जाप में किसी प्रकार की कोई बाधा न पड़े और ध्यान न भटके।
- जाप करने के लिए प्रातः काल का समय सबसे उत्तम रहता है, क्योंकि इस समय वातावरण शांत, शुद्ध और सकारात्मक रहता है।
- यदि हमेशा जाप करते हैं तो प्रतिदिन एक ही स्थान और एक निश्चित समय पर भी मंत्र जाप करना चाहिए।
- मंत्र जाप करते समय माला को खुला न रखें। माला सदैव गौमुखी के अंदर ढक कर ही रखनी चाहिए।
- जाप की माला खरीदते समय भलिभांति देख लें कि उसमें 108 मनके होने चाहिए और हर मनके के बीच में एक गांठ लगी होनी चाहिए। ताकि जाप करते समय संख्या में कोई त्रुटि न हो।
- जिस देवी-देवता का जाप कर रहे हैं उनकी छवि को मन में रखकर जाप करना चाहिए और नित्य कम से कम एक माला का जाप पूर्ण अवश्य करना चाहिए।
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