Know Today • Plan Tomorrow • Live Better
Home Articles Other Articles
Other Articles

श्रीविद्या त्रिपुरा, महात्रिपुरा, सुंदरी देवी के ध्यान, कृपा और आध्यात्मिक उत्थान के लिए एक बहुत ही रहस्यमय साधना है।

॥ श्री आनन्दलहरी स्तोत्रम् पुरश्चरण साधना विधि ॥
(श्री आदि शंकराचार्य विरचित)
“शिवः शक्त्यायुक्तो यदि भवति शक्तः प्रभवितुं…”
से आरंभ आनन्दलहरी, श्रीविद्या की मूलाधार साधना है। यह स्तोत्र श्रीविद्या, त्रिपुरा, महात्रिपुरसुन्दरी देवी के ध्यान, कृपा और आत्मिक उत्थान हेतु अत्यंत रहस्यमय, शक्तिशाली और शुभकारी है।


📚 1. आनन्दलहरी क्या है?

श्री आदि शंकराचार्य द्वारा रचित प्रथम ४१ श्लोकों का संकलन –
🔹 आनन्दलहरी = “शिव-शक्ति” के आनंदमय तत्त्व की वाणी
🔹 यह श्रीविद्या, कुण्डलिनी जागरण और महात्रिपुरसुन्दरी कृपा का प्रवेशद्वार है।

📜 पूर्ण संग्रह:

  • श्लोक संख्या: 41
  • कई साधक सौंदर्यलहरी (100 श्लोक) को साथ पढ़ते हैं, परन्तु केवल आनन्दलहरी श्रीविद्या-तंत्र में विशुद्ध ध्यान-भाग है।

🕉️ 2. पुरश्चरण क्या है?

“पुरश्चरण” = संकल्पपूर्वक, विधिपूर्वक, निश्चित संख्या में स्तोत्र-पाठ, फिर हवन, तर्पण, मार्जन, ब्राह्मण भोजन इत्यादि।
👉 इससे साधक को स्तोत्र की पूर्ण सिद्धि, आत्मिक शुद्धि, भोग और मोक्ष दोनों प्राप्त होते हैं।

Want answers for your own kundli?

Chat or call experienced astrologers on the AstroShrine app, in Hindi and English.

Get the App

📅 3. कब करें? (उत्तम काल)

काल कारण
नवरात्रि (चैत्र या शारदीय) देवी साधना हेतु श्रेष्ठतम
शुक्रवार श्रीविद्या प्रधान वार
अष्टमी/नवमी तिथि शक्ति प्रधान तिथि
पूर्णिमा/अमावस्या मन्त्र सिद्धि काल
ब्रह्ममुहूर्त (4–6am) कुण्डलिनी जागरण हेतु उपयुक्त
ALSO READ  करवा चौथ 2026 की पूजा विधि: जानें कैसे करें करवा माता की पूजा

🛕 4. कहाँ करें? (स्थान)

  • शांत, स्वच्छ, एकांत साधना स्थल
  • घर के उत्तर-पूर्व कोण में शक्ति यंत्र, त्रिपुरसुन्दरी चित्र या श्रीचक्र स्थापित करें
  • यदि संभव हो, श्रीविद्या उपासक से दिशा लें
  • लाल वस्त्र, कुमकुम, चंदन, पुष्प, दीप, श्रीचक्र/यंत्र आदि आवश्यक

📿 5. कितनी बार करें? (संख्या और अवधि)

स्तर पाठ संख्या अवधि
सामान्य 11×9 दिन 99 पाठ
मध्यम 108×11 दिन 1188 पाठ
पूर्ण सिद्धि 1008 पाठ + हवन + तर्पण + ब्राह्मण भोजन

📌 हर पाठ में 41 श्लोक हैं।


🙏 6. कैसे करें? (विधि विस्तार)

🪔 (1) संकल्प:

“मम आत्मविकास, चित्तशुद्धि, देवीकृपा, श्रीविद्यासिद्ध्यर्थं श्री आनन्दलहरीस्तोत्रस्य पुरश्चरणं करिष्ये।”

🌺 (2) श्रीचक्र/देवी पूजन:

  • श्री यंत्र का अभिषेक करें (गंगाजल, चंदन, कुमकुम, पुष्प)
  • “ॐ श्रीमात्रे नमः” जप से आवाहन
  • श्रीसूक्त या त्रिपुरा गायत्री द्वारा ध्यान

📖 (3) पाठ विधि:

  • स्पष्ट उच्चारण से 41 श्लोकों का पाठ करें
  • माला से करें या बिना माला मानसिक जप करें
  • प्रत्येक पाठ के बाद “ॐ ऐं ह्रीं श्रीं” त्रिपुरा बीज मंत्र का जप करें

🔥 (4) समापन में हवन:

  • पाठ संख्या का 1/10 भाग हवन
  • हवन सामग्री: गाय का घृत, तिल, गुड़, कमल पुष्पदल आदि
  • प्रत्येक श्लोक या मंत्र का उच्चारण “स्वाहा” के साथ

🌊 (5) तर्पण, मार्जन, ब्राह्मण भोज:

  • तर्पण = जल अर्घ्य + श्लोक तर्पण
  • मार्जन = जल अभिमंत्रित कर तन-मन शुद्धि
  • ब्राह्मण या कन्या भोजन, वस्त्रदान करें
ALSO READ  धनतेरस 2026: पूजा विधि, शुभ मुहूर्त, खरीदारी, यम दीपदान और कथा – संपूर्ण जानकारी

🎯 7. क्यों करें? (लाभ)

उद्देश्य फल
मानसिक शक्ति, एकाग्रता, आत्मिक विकास कुंडलिनी उन्नयन
जीवन संतुलन, दिव्य दृष्टि अन्तर्ज्ञान
भोग-सिद्धि एवं मोक्ष श्रीविद्या साधना का द्वार
दैहिक, दैविक, भौतिक कष्ट निवारण चित्त-शांति
स्त्री-पुरुष ऊर्जा संतुलन आन्तरिक आनंद की प्राप्ति

⚠️ 8. नियम व सावधानियाँ:

  • सात्त्विक भोजन, संयमित जीवन
  • नियमपूर्वक एक ही समय/स्थान/आसन
  • त्रिपुरा, श्रीविद्या मंत्र बिना दीक्षा के उच्चारण न करें
  • स्तोत्र पाठ की शुद्धता बनाए रखें
  • स्त्रियों को विशेष संयम व पवित्रता रखें

You have read half of this article

Log in to keep reading. Creating an account is completely free – with Google or mobile OTP, in a minute.

Log in & read more New here? Create a free account

Have a question about your life?

Get personal guidance on kundli, marriage, career and Vastu from experienced astrologers.

Consult Now