संसार के हर स्त्री-पुरुष की विवाह के बाद पहली कामना संतान प्राप्त करने की रहती है परन्तु कई बार देखने में यह आता है कि पति-पत्नी शारीरिक एवं मानसिक रूप से पूर्ण स्वस्थ्य रहने के बाद भी निःसंतान ही रह जाते हैं। किसी भी दंपत्ति के निःसंतान रहने में भाग्य के साथ-साथ वास्तुदोष भी एक महत्त्वपूर्ण कारण होता है।
यदि कोई दम्पत्ति निःसंतान है तो उन्हें चाहिए कि वह अपने घर के वास्तु दोष को दूर करें क्योंकि वास्तु दोष के कारण घर में नकारात्क ऊर्जा पैदा होती है जो संतान प्राप्ति में बाधा पैदा करती है। जो दम्पत्ति निःसंतान हैं उन्हें मेरी यह सलाह है कि वे योग्य डॉक्टर से उचित जांच अवश्य करवाए साथ ही घर में जो वास्तुदोष है उन्हें दूर करें ताकि उनकी संतान प्राप्ति की कामना पूर्ण हो सके। सामान्यतः नीचे लिखे कुछ वास्तुदोष वंशवृद्धि में बाधा का कारण बनते हैं-
1 जिस किसी घर की दक्षिण-पश्चिम दिशा में निर्माण कार्य न होने के कारण खुली हुई हो ईशान कोण में निर्माण होने के कारण घर के ईशान कोण वाले भाग में खुली जगह न हो और उसकी उत्तर और पूर्व दिशा में पड़ोसियों के घर के कारण वहां दरवाजा या खिड़की भी न हो ऐसे कोने वाले कमरे में जिन दम्पत्ति का बेडरूम होता है उन्हें संतान प्राप्ति में बाधा पैदा होती है।
2 उत्तर भाग में खाली जगह न हो और अहाते की हद से लगकर घर हो और दक्षिण में खाली जगह हो तो वंशवृद्धि रूक जाती है।
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