जिस प्रकार ग्रहों का घूमना, मौसम का बदलना इत्यादि प्रकृति के नियम हैं। इसी प्रकार वास्तु सिद्वान्त भी प्राकृतिक नियम हैं।
भूमि/भवन के नार्थ–ईस्ट भाग का सम्बन्ध धन, पूरे परिवार की सुख–शान्ति, पहली/चौथी/ आठवीं संतान और घर के कमाने वाले सदस्य से होता है।
साउथ–ईस्ट भाग का सम्बन्ध सुख–शान्ति, प्रशासनिक कार्यों, महिलाओं व दूसरी/छठी संतान से होता है।
साउथ–वेस्ट भाग का सम्बन्ध घर के मुखिया व पहली/पाँचवी संतान से होता है।
नार्थ–वेस्ट भाग का सम्बन्ध सुख–शान्ति, प्रशासनिक कार्यों, महिलाओं व तीसरी/सातवीं संतान से होता है।
उत्तर / दक्षिण भाग का सम्बन्ध धन, महिलाओं के स्वास्थ्य, मान–सम्मान व स्वभाव से होता है। पूर्व / पश्चिम भाग का सम्बन्ध पुरूषों के स्वास्थ्य, मान–सम्मान व स्वभाव से होता है।
पूर्व, पश्चिम, नार्थ–ईस्ट या साउथ–वेस्ट भाग में दोष होने पर, सबसे बुजुर्ग सदस्य जैसे दादा/पिता बीमार रहेंगे उनकी पहली, चौथी और पाँचवी संतान को ससुराल से परेशानी व धन की कमी रहेगी। दादा/पिता की मृत्यु होने पर डेढ़ बर्ष के अंदर–अंदर घर का सबस़े बड़ा पुरूष सदस्य बीमार हो जाएगा।
उत्तर, दक्षिण, नार्थ–वेस्ट या साउथ–ईस्ट भाग में दोष होने पर, दादी/माता बीमार रहेंगी, दूसरी, तीसरी, छठी व सातवीं संतान को प्रशासनिक समस्याएँ, धन की कमी, ससुराल से परेशानी, एक्सीडेंट, जेल, आग व चोरी की घटनाएँ होंगी। दादी/माता की मृत्यु होने पर डेढ़ बर्ष के अंदर घर की सबसे बड़ी महिला बीमार हो जाएगी।
जिस घर में माता–पिता निवास करते हैं, उस घर का वास्तु जैसा भी होगा वह उनकी संतानों पर लागू रहेगा, चाहें वह संतान कहीं भी रहे। माता या पिता में से किसी एक के भी जीवित रहने पर वास्तु लागू रहेगा।
माता/पिता दोनो की मृत्यु के पश्चात यदि एक ही भवन में जितने भाई–बहन निवास करते हैं, वह अलग–अलग परिवारों के रूप में माने जाएँगे। जो परिवार भवन के जिस भाग में रहेगा, उस भाग के दोष उस परिवार पर लागू हो जाएँगे।
माता/पिता दोनो की मृत्यु के पश्चात पति , पत्नी और बच्चे जिस घर में रहेंगे उस घर का वास्तु लागू होगा। यदि इनमें से कोई भी (पति/पत्नी/बच्चे) बाहर जाता या रहता है तो उस पर इस घर का वास्तु ही लागू होगा।
जिस भवन आप रहते हैं उसमें कोई भी रिश्तेदार जैसे चाचा, मामा, भांजा, साला, जीजा, फूफा, गुरू, सेवक, बुआ, मामी, चाची, नानी, नौकरानी इत्यादि निवास करते हैं तो भवन के जिस भाग में यह रहेंगे उस भाग का वास्तु और इनके अपने घर का वास्तु भी इन पर लागू रहेगा।
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