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Vaastu Shastra : करना चाहते है बिज़नेस तो करें ये वास्तु उपाय,मिलेगा दुगुना लाभ

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करना चाहते है बिज़नेस तो करें ये वास्तु उपाय,मिलेगा दुगुना लाभ

वास्तु शास्त्र के अनुसार घर हो या दुकान, बिल्डिंग हो यो फिर कोई बड़ी छोटी फैक्ट्री, इनका निर्माण करते समय वास्तु के नियमों का धयान रखना बेहद जरूरी माना जात है। कहा जाता है जिस जगग पर किसी भी चीज़ का निर्माण वास्तु के अनुसार नही किया जाता वहां हमेशा नकारात्मक ऊर्जा को तो वास होता ही है साथ ही साथ उस जगह से किसी भी प्रकार का लाभ नहीं मिलता।

आपकी जानकारी के लिए बता दें वास्तु शास्त्र में न केवल घर को बनाने के ही नियम आदि नहीं बताए बल्कि इसमें फैक्ट्री के निर्माण से जुड़ी भी कई हिदायतें दी गई है। तो वहीं इसमें इससे जुड़े कई प्रकार के उपाय बताए गए हैं जिससे जीवन में सुख-समृद्धि बनी रहती है और वास्तु दोष भी नहीं लगता।

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वास्तु विशेषज्ञ के मुताबिक के नियमों का उलंघन करना नुकसान का कारण बन सकता है। इसलिए किसी भी तरह के निर्माण कार्य को शुरू करने से पहले इसमें दिए गए नियमों का ध्यान जरूर रखना चाहिए। कहा जाता है पूरे नियमों के अंतर्गत कार्य किए जाएं तो इसके अनेकों फायदे देखने मिलते हैं।

जिस तरह घर के निर्माण के वक्त कुछ खास बातों का ख्याल रखा जाता है ठीक उसी प्रकार फैक्टरी बनवाते समय भी कुछ बातों का पालन करना अति आवश्यक है। आज हम आपको फैक्ट्री निर्माण से जुड़े कई ऐसे उपाय बताने जा रहे हैं जो निर्माण कार्य में बेहद सहायक साबित होते हैं। तो चलिए आज हम आपको फैक्टरी के निर्माण से जुड़े कुछ ऐसे उपाय बताते हैं जिससे आपको हो सकता है।

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लाभ ही लाभ-

फैक्टरी का निर्माण आर्थिक लाभ के लिए किया जाता है इसलिए ध्यान दें हमेशा ऐसी भूमि का चयन करें जो सिंह मुखी भूमि हो। यानि आगे से चौड़ा और पीछे से पतला हो। ऐसी जगह पर फैक्ट्री बनवाना शुभ होता है।

ऐसी होनी चाहिए बाउंड्री-
फैक्टरी जिस भूमि पर बन रही है उसकी बाउंड्री की दीवार पश्चिम एवं दक्षिण की तुलना में पूर्व और उत्तर दिशा की तरफ नीची होनी चाहिए यानि दक्षिण-पश्चिम में निर्माण अधिक भारी हो।

कैसा होना चाहिए मुख्य द्वार-

वास्तु शास्त्र के अनुसार फैक्टरी का मेन गेट उत्तर-पूर्व की ओर रखना चाहिए। तो वहीं छोटे द्वार को उत्तर-पश्चिम दिशा में बनाना अच्छा रहता है। अगर मेन गेट पूर्व दिशा में है तो स्टोर को दक्षिण-पूर्व दिशा में बनवाएं और यदि गेट उत्तर की ओर है तो को उत्तर-पश्चिम में होनी चाहिए।

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बिजली से चलने वाले उपकरणों को कहां रखना है लाभकारी-
बिजली के उपकरण जैसे जनरेटर, चिमनी, टेलीफोन का खम्बा, मोटर, गैस, ट्रांसफार्मर आदि जैसी चीजें को हमेशा अग्नि की दिशा यानि पूर्व और दक्षिण दिशा के मध्य में रखना चाहिए।

सबसे महत्वपूर्ण है उत्तर-पूर्व दिशा-
भूमि का ईशान कोण अर्थात उत्तर-पूर्व का कोना कटा हुआ नहीं होना चाहिए, इसे अशुभ माना जाता है। इस कोने में किसी प्रकार का भारी सामान नहीं रखना चाहिए। पानी का काम जैसे बोरिंग या सीवरेज का काम, अंडरग्राउंड टैंक ईशान कोण में बनाना लाभदायक होता है। हालांकि ओवरहेड पानी की टंकी सदैव दक्षिण-पूर्व दिशा में ही रखना उपयुक्त है। इस दिशा में शौचालय बनवाना भी वास्तु के मुताबिक अशुभ माना गया है।