Home Articles उपाय
उपाय

जानिए, नान्दी श्राद्ध के नियम…

जानिए, नान्दी श्राद्ध के नियम…

 

नान्दीश्राद्ध के कुछ नियम

इस श्राद्ध में”स्वधा्र“ की जगह ”स्वाहा“ शब्द का उच्चारण होता है। इसमें सब कर्म दक्षिण यज्ञोपवीत से करना होता है। नान्दीश्राद्ध में कुशा की जगह मूलरहित दर्भ ग्रहण करें, प्रत्येक वस्तु युग्मरूप में लेनी चाहिए। इस कार्य में यजमान उत्तराभिमुख और ब्राह्मण पूर्वाभिमुख अथवा यजमान पूर्वाभिमुख तथा यजमान ब्राह्मण उत्तराभिमुख बैठे।

इस श्राद्ध में पिण्ड़ों के विषय में दही,शुद्ध मधु ,,शहद,, बेर, दाख व आंवले काम में लिये जाते हैं। प्रथमा विभक्ति को अंत में लगाकर संकल्प किया जाता है। इसमें नाम व गोत्र का उच्चारण नहीं किया जाता है। इस श्राद्ध में अपसव्य नहीं होता,तिल एवं पितृतीर्थ जल भी काम में नही लिया जाता। श्राद्ध का अंगरूप तर्पण भी इसमें नहीं किया जाता।

ALSO READ  Ganesh Chaturthi 2026 Horoscope: What are Bappa bringing for the 12 zodiac signs?

नान्दीश्राद्ध में पिता,दादा और परदादा तथा माता,नाना,परनाना का स्मरण किया जाता है,उन्हें श्रद्धांजलि दी जाती है। इस वर्ग में जीवित व्यक्ति जिसका पार्वण न हो,उस पार्वण के विषय का श्लोक एक देश न पढ़ें। नान्दीश्राद्ध में आरती नहीं होती। नान्दीश्राद्ध में यजमान पत्नी को अपने साथ न बैठाकर अपने आसन से दूर ही बैठना चाहिए।

आप इस लेख का आधा भाग पढ़ चुके हैं

आगे पढ़ने के लिए लॉगिन करें। खाता बनाना पूरी तरह निःशुल्क है – Google या मोबाइल OTP से, एक मिनट में।

लॉगिन करें और आगे पढ़ें नया यूज़र? निःशुल्क खाता बनाएँ

क्या आपके जीवन में कोई प्रश्न है?

अनुभवी ज्योतिषियों से कुंडली, विवाह, करियर और वास्तु पर व्यक्तिगत परामर्श लें।

अभी परामर्श लें