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जब चन्द्रमा सप्तम भाव में हो

जब चन्द्रमा सप्तम भाव में हो

चन्द्रमा सप्तम भाव में

सप्तम भाव में चन्द्रमा होने से जातक के मस्तिष्क को शांन्त रखता हैं।जातक का एक से अधिक स्त्रिओं से सम्बन्ध हो सकता है। अतः मोती धारण करना इन क्षेत्रों में अधिक फलदायक हो सकता है। पत्नी का स्वभाव भी शान्त रहेगा।

1.मेष लग्न – चन्द्रमा चतुर्थेश होकर सप्तम भाव में होगा। घरेलू सुख शान्ति में वृद्धि करेेगा,जातक को रोमान्टिक बनाएगा। स्त्रियांे में लोगप्रिय होगा। मोती धारण करना लाभदायक रहेगा।

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2.वृष लग्न – चन्द्रमा तृतीयेश होकर सप्तम भाव में नीच राशि वृश्चिक में होगा जातक परिश्रमी बनेगा तथा मोती धारण करने से उसे सफलता प्राप्त होगी परन्तु विवाहित जीवन असफल रहेगा क्यांेकि चन्द्रमा नीच राशि में होगा।

3. मिथुन लग्न – चन्द्र्रमा द्वितीयेश होकर सप्तम स्थान में धनु राशि में स्थित होगा। मोती धारण करने से धन का सुख रहेगा,पारिवारिक सुख में वृद्धि होगी ।

4. कर्क लग्न – चन्द्रमा लग्नेश होकर सप्तम स्थान में मकर राशि में स्थित होगा जातक अपनी स्त्री के वश में रहेगा। उसका व्यक्तिगत प्रभाव भी इर्द-गिर्द अच्छा रहेगा। मोती धारण करने से उसे कामकाज आदि में सफलता मिलेगी।

5.सिंह लग्न – चन्द्रमा द्वादशेश होकर सप्तम भाव में कुम्भ राशिर में स्थित होगा जो जातक को भोग विलास में व्यस्त कर सकता है। धन का व्यय भी बढ़ सकता है। अतः मोती धारण न करें।

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