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व्यवसाय में तरक्की पाने के लिए करें ये उपाय ?

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व्यवसाय के लिए उपयोगि कारकत्व

व्यापार,शिक्षा,शिक्षक,सम्पादक,मुद्रक,स्टाक ब्रोकर्स,ज्योतिष,शास्त्र,अध्यात्म,आयकर,बिक्रीकर,आबकारी कर,बैंकिंग,न्याय सम्बन्धी शिक्षा,कर्मकाण्ड, पाण्डित्य, लेखाकार,साहित्यकार,अर्थशास्त्र,वेद-पुराण का अध्ययन-अभ्यास,विधि विशेषज्ञ,होटल मैनेजमेन्ट,बीमा सम्बन्धित स्वीकारा गया है।

बृहस्पति को सर्वाधिक शुभ और सदा शुभ ग्रह के रूप में मान्यता प्राप्त है। यदि जन्मांग में बृहस्पति केन्द्र अथवा त्रिकोण में स्थित है तथा स्वामित्व भी अनुरूप है तों जातक के जन्मांग के सहस्त्रों दोष स्वतः ही निरस्त हो जाते हैं।बृहस्पति दशमस्थ हो तो जातक शिक्षक के पद पर कार्यरत होता है। तथा यदि यह बृहस्पति स्वराशिगत अथवा स्वनवांशस्थ हो तो जातक एक प्रसिद्ध और निपुण शिक्षक के रूप में प्रशंसित और प्रतिष्ठित होता है। ऐसा जातकःप्रायः विश्वविद्यालय,इंजीनियरिंग कालेज अथवा एम.बी.ए. आदि के शिक्षण संस्थान में शिक्षण से सम्बन्धित कार्य करता है।

बृहस्पति की राशि मिथुन या कन्या में स्थित हो तो भी जातक वैज्ञानिक बनता है। तथा इसी तरह से बुध की यदि बृहस्पति की राशि में स्थित हो तो भी वैज्ञानिक होता है। बृहस्पति और मंगल का संयुक्त प्रभाव जातक को चिकित्सा के क्षेत्र में सफल बनाता है। बृहस्पति स्वस्थ जीवन का कारक ग्रह है। इसलिए किसी भी चिकित्सक के जन्मांक में बृहस्पति सुर्य और मंगल का व्यवसाय से सम्बन्ध होना अपेक्षित है।