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मर्यादा रेखा का अतिक्रमण-जीवन में तबाही की वजह –

मर्यादा रेखा का अतिक्रमण-जीवन में तबाही की वजह –
जीवन को समृद्धशाली एवं सुखहाल बनाने के लिए व्यक्ति को सुशील, सदाचारी एवं संस्कावान होना आवश्यक है, यही वह कारण हैं जिनके द्वारा आत्मविश्वास एवं बौद्धिक क्षमता का विकास होता है। जब भी किसी कर्म की शुरूआत दृढ़ निष्चय और सकारात्मक उद्देश्य को पूर्ण करने के लिए होती है तो सबसे पहले वह समय सीमा का निर्धारण कर अपने समय का अधिक से अधिक लाभ उठाता है। व्यक्तिगत एवं सामाजिक व्यवहार में अनुशासन, मनुष्य के विचारों में भी अनुशासन का कारण बनता है। जो व्यक्ति अपने समस्त कामों में अनुशासन का पालन करता है तो उसके विचार भी व्यवस्थित हो जाते हैं। किंतु उसके विपरीत यदि उसके जीवन में अपने या परिवार या समाज द्वारा बनाई गई मर्यादा रेखा का उल्लंघन होता है, तब से उसके जीवन में तबाही प्रवेष कर जाती है। इस तबाही को किसी व्यक्ति की कुंडली में प्रथमतः उसके एकादष स्थान, तीसरा स्थान एवं उसके गोचर की दषाओं के द्वारा जाना जा सकता है। यदि किसी की कुंडली में एकादष स्थान पर शनि या राहु होकर विपरीत भाव में बैठ जाए तो ऐसे बच्चे के जीवन में अनुषासन विलुप्त हो जाता है और इसी समय यदि राहु, शनि या शुक्र की दषा भी चल जाए तो ये सोने में सुहागा का कार्य करता है अतः किसी भी उम्र में यदि इस तरह के विपरीत भाव दिखाई दें तो जीवन में तबाही को रोकने के लिए ग्रहों की शांति कराना, मंत्रों का जाप एवं व्रत रखना चाहिए।

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