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ज्योतिष में राक्षस गण का रहस्य? जानिए इसके प्रभाव, स्वभाव और विवाह पर असर

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राक्षस गण क्या है?

ज्योतिष शास्त्र में जब भी विवाह, स्वभाव, मानसिक प्रवृत्ति और आपसी अनुकूलता की चर्चा होती है, तब गण दोष का विशेष स्थान होता है। विशेष रूप से विवाह से पहले कुंडली मिलान में राक्षस गण को सबसे अधिक गंभीर माना जाता है। समाज में राक्षस गण को लेकर अनेक भ्रांतियाँ, डर और नकारात्मक धारणाएँ प्रचलित हैं, जबकि शास्त्रों में इसका अर्थ इससे कहीं अधिक गहरा और वैज्ञानिक है।

राक्षस गण का संबंध व्यक्ति के स्वभाव, मानसिक संरचना, ऊर्जा, व्यवहार और जीवन दृष्टिकोण से होता है, न कि किसी को “राक्षस” कहने या बुरा सिद्ध करने से।

गण क्या होता है?

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार गण व्यक्ति के जन्म नक्षत्र पर आधारित एक मानसिक और स्वभावगत वर्गीकरण है। कुल 27 नक्षत्रों को तीन गणों में विभाजित किया गया है—

  1. देव गण
  2. मनुष्य गण
  3. राक्षस गण

गण का सीधा संबंध व्यक्ति के विचार, व्यवहार, प्रतिक्रिया करने की क्षमता, जीवन शैली और संबंधों में संतुलन से होता है। यह दर्शाता है कि व्यक्ति परिस्थितियों से कैसे निपटता है।

राक्षस गण क्या होता है?

राक्षस गण उन नक्षत्रों को कहा जाता है जिनमें जन्म लेने वाले जातकों का स्वभाव तीव्र, प्रखर, साहसी, स्वतंत्र सोच वाला और कभी-कभी उग्र होता है। राक्षस गण का अर्थ क्रूर या अमानवीय नहीं, बल्कि असाधारण ऊर्जा, प्रबल इच्छाशक्ति और सीमाओं को तोड़ने की प्रवृत्ति से है।

राक्षस गण वाले व्यक्ति अक्सर—

  • अन्याय के विरुद्ध खड़े होते हैं
  • दबाव में नहीं झुकते
  • अपने सिद्धांतों पर अडिग रहते हैं
  • जोखिम लेने से नहीं डरते
  • समाज के नियमों को चुनौती देने की क्षमता रखते हैं
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शास्त्रों में राक्षस गण को तामसिक प्रवृत्ति से जोड़ा गया है, जिसका अर्थ नकारात्मक नहीं बल्कि शक्तिशाली ऊर्जा है।

राक्षस गण के नक्षत्र कौन-कौन से हैं?

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार निम्नलिखित नक्षत्र राक्षस गण में आते हैं—

  • आर्द्रा
  • आश्लेषा
  • मघा
  • ज्येष्ठा
  • मूल

इन नक्षत्रों में जन्म लेने वाले जातक स्वभाव से गूढ़, रहस्यमयी, तीक्ष्ण बुद्धि वाले और कभी-कभी विद्रोही होते हैं।

राक्षस गण क्यों बनता है?

राक्षस गण का निर्माण किसी दोष या पाप से नहीं होता, बल्कि यह पूर्व जन्मों के संस्कार, आत्मा की परिपक्वता और कर्मों की तीव्रता का परिणाम माना जाता है।

1. पूर्व जन्म के कर्मों का प्रभाव

शास्त्रों के अनुसार राक्षस गण वाले व्यक्ति ने पूर्व जन्म में संघर्षपूर्ण जीवन जिया होता है। उसने अन्याय, युद्ध, सत्ता, तप या कठोर निर्णयों से जुड़े कर्म किए होते हैं।

2. आत्मा की उन्नत अवस्था

राक्षस गण यह दर्शाता है कि आत्मा साधारण अनुभवों से आगे बढ़ चुकी है और अब कठिन परिस्थितियों में स्वयं को परखने आई है।

3. ग्रहों की तीव्र स्थिति

मंगल, शनि, राहु या केतु जैसे ग्रह यदि प्रभावशाली हों, तो व्यक्ति की कुंडली में राक्षस गण का प्रभाव और भी स्पष्ट हो जाता है।

4. तामसिक गुणों की प्रधानता

गीता के अनुसार तीन गुण होते हैं—सत्व, रजस और तमस। राक्षस गण में तमस और रजस की प्रधानता होती है, जिससे व्यक्ति तीव्र और निर्णायक बनता है।

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राक्षस गण वाले व्यक्ति का स्वभाव

राक्षस गण के जातक सामान्य लोगों से अलग होते हैं। उनका स्वभाव इस प्रकार हो सकता है—

  • स्पष्टवादी और बेबाक
  • भावनात्मक रूप से गहरे
  • अत्यधिक वफादार या अत्यधिक कठोर
  • आत्मसम्मान के प्रति सजग
  • अन्याय सहन न करने वाले
  • नेतृत्व क्षमता से भरपूर

हालाँकि यदि कुंडली संतुलित न हो तो यही गुण—

  • क्रोध
  • अहंकार
  • जिद
  • शक
  • संबंधों में टकराव

का कारण भी बन सकते हैं।

राक्षस गण का जीवन पर प्रभाव

1. करियर और कार्यक्षेत्र

राक्षस गण वाले लोग ऐसे क्षेत्रों में सफल होते हैं जहाँ—

  • जोखिम हो

  • निर्णय क्षमता चाहिए

  • साहस और नेतृत्व जरूरी हो

जैसे—पुलिस, सेना, राजनीति, रिसर्च, गुप्तचर विभाग, ज्योतिष, तंत्र, चिकित्सा, प्रशासन, व्यापार।

2. आर्थिक स्थिति

ये लोग धन कमाने में सक्षम होते हैं, परंतु भावनाओं या गुस्से में गलत निर्णय लेने से धन हानि भी हो सकती है।

3. मानसिक स्थिति

इनकी मानसिक ऊर्जा बहुत तीव्र होती है। यदि सही दिशा न मिले तो तनाव, अवसाद या अकेलापन महसूस कर सकते हैं।

विवाह में राक्षस गण का महत्व

कुंडली मिलान में कुल 36 गुण होते हैं, जिनमें गण मिलान के 6 गुण होते हैं। यदि वर-वधू में राक्षस गण का मेल न हो तो गण दोष बनता है।

राक्षस गण विवाह में क्यों कठिन माना जाता है?

क्योंकि—

  • स्वभाव में टकराव होता है
  • अहंकार की समस्या होती है
  • भावनात्मक तालमेल कठिन होता है
  • नियंत्रण और स्वतंत्रता को लेकर संघर्ष होता है
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विशेषकर जब एक साथी देव गण और दूसरा राक्षस गण का हो।

क्या राक्षस गण हमेशा अशुभ होता है?

नहीं। यह सबसे बड़ी भ्रांति है।

यदि—

  • दोनों का गण समान हो
  • कुंडली में ग्रह अनुकूल हों
  • अन्य गुण मेल खाते हों

तो राक्षस गण का विवाह अत्यंत सफल भी हो सकता है।

कई महान योद्धा, राजा, वैज्ञानिक और साधक राक्षस गण के थे।

राक्षस गण के सकारात्मक पहलू

  • असाधारण साहस
  • सत्य के लिए संघर्ष
  • गहन प्रेम और निष्ठा
  • नेतृत्व और शक्ति
  • आध्यात्मिक गहराई

राक्षस गण के नकारात्मक प्रभाव कब बढ़ते हैं?

  • जब मंगल, राहु या शनि अशुभ हों
  • जब भावनात्मक संतुलन न हो
  • जब अहंकार हावी हो
  • जब विवाह में समझ की कमी हो

राक्षस गण दोष से बचाव के उपाय

यदि विवाह में गण दोष हो तो—

  • कुंडली का संपूर्ण विश्लेषण आवश्यक है
  • नाड़ी, भकूट और ग्रह स्थिति देखी जाए
  • शिव-पार्वती पूजन
  • रुद्राभिषेक
  • मंगल शांति
  • चंद्र शांति

जैसे उपाय सहायक होते हैं।

निष्कर्ष

राक्षस गण कोई अभिशाप नहीं बल्कि शक्ति का प्रतीक है। यह दर्शाता है कि व्यक्ति साधारण जीवन के लिए नहीं, बल्कि संघर्ष, नेतृत्व और परिवर्तन के लिए जन्मा है। सही मार्गदर्शन, संयम और समझ से राक्षस गण वाला व्यक्ति अपने जीवन को ऊँचाइयों तक पहुँचा सकता है।

विवाह या जीवन के किसी भी निर्णय में केवल गण नहीं, बल्कि पूरी कुंडली का अध्ययन आवश्यक है। सही ज्योतिषीय सलाह से राक्षस गण भी वरदान बन सकता है।