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बुरी आत्मा भगाने का ये रहा शानदार उपाय

बुरी आत्मा भगाने का ये रहा शानदार उपाय

बुरी आत्मा भगाने का ये रहा शानदार उपाय

Vastu Purush: हिंदू धर्म में 56 करोड़ देवी-देवताओं की परिकल्पना व उनका अस्तित्व माना जाता है। इनमें प्रमुख ब्रह्मा, विष्णु, महेश व त्रिशक्ति लक्ष्मी, सरस्वती व पार्वती हैं। गृह निर्माण के पश्चात वास्तु-पुरुष की पूजा करते हुए यही कामना की जाती है कि इस आवास में त्रिशक्तियों का वास रहे और वे हमें सुख-समृद्धि का आशीर्वाद प्रदान करें। वास्तु-पुरुष मंडल भी अंतरिक्ष में उपलब्ध विभिन्न ऊर्जाओं का प्रतीक है, ऊर्जा का उचित ढंग से गृह में प्रवेश हो यही इसका अभिप्राय है।

पंच भूत यथा वायु, अग्नि, भूमि, जल व आकाश तत्व का उचित समायोजन घर में हो।जीवन शक्ति प्रदाता सूर्य व इसका प्रभाव।पृथ्वी की आकर्षण शक्ति व चुम्बकीय लहरों का प्रभाव।वास्तु-पुरुष मंडल का उचित प्रयोग।गृह निर्माण की प्रक्रिया शुरू होने से लेकर निर्माण संपूर्ण होने के बाद गृह प्रवेश के दौरान शास्त्रों में चार बार पूजा की व्यवस्था है।प्रथम पूजा निर्माण आरम्भ करने पर की जाती है, जिसे शिलान्यास कहा जाता है। इसमें नंदादि पांच शिलाओं का पूजन होता है। दूसरी पूजा देहरी न्यास कहलाती है। द्वार हेतु देहरी रखी जाती है, तब यह पूजा होती है। तीसरी पूजा आवास संपूर्ण होने पर वास्तु मंडल की पूजा की जाती है।इसमें मंत्रोच्चार व बलि विधान द्वारा बुरी आत्माओं को घर से दूर किया जाता है और लाभ प्रदान कराने वाली शक्तियों का आह्वान कर उनकी स्थापना की जाती है।

चतुर्थ पूजा के माध्यम से गृह में प्रवेश किया जाता है। प्राय: तीसरी और चौथी पूजा एक साथ ही संपन्न की जाती है। गृह प्रवेश से पूर्व प्रथम रात्रि को व दूसरे दिन गृह प्रवेश के समय ये पूजाएं की जाती हैं।वास्तु-पुरुष मंडल के माध्यम से प्रतीकात्मक वास्तु-पुरुष की पूजा की जाती है। पुरोहित या वास्तु पूजा विशेषज्ञ से ही यह पूजा संपन्न कराई जाती है। इसमें मुख्यत: 81 पदों वाले वास्तु-पुरुष मंडल की रचना चौकी पर की जाती है।

कुंकुम से 10-10 सीधी व आड़ी रेखाओं से 81 पद वास्तु मंडल तैयार किया जाता है। फिर इन 81 कोष्ठकों में देवताओं के अनुसार रंगीन अक्षत भर कर देवताओं की स्थापना की जाती है। बाह्य कोष्ठक में 32 देवता होते हैं, जो क्रमश: अग्नि आदि हैं। मध्य के 9 स्थान ब्रह्मा हेतु सुरक्षित हैं। इसके अलावा 13 देवता भीतर की तरफ होते हैं।वास्तु मंडल की स्थापना कर वास्तु मंत्रों का उच्चारण करते हुए अक्षत, दूर्वा, दही, पुष्प व अन्य पूजन सामग्री से षोडशोपचार पूजन करते हैं और वास्तु पुरुष से इस प्रकार प्रार्थना की जाती है- ‘हे भूमिरू पी शैय्या पर शयन करने वाले वास्तु-पुरुष आपको मेरा शत-शत नमन।

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