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गुरू का शुभ रत्न पुखराज,जानिए धारण करने का तरीका…

गुरू का शुभ रत्न पुखराज,जानिए धारण करने का तरीका…

गुरू का रत्न पुखराज
पुखराज नग गुरू का रत्न होता है, यह पीले रंग का होता है तथा इसकी धातु सोना होती है। इसलिये पुखराज नग हमेशा सोने में ही जड़वाना चाहिये। जड़वाने के बाद इसकी प्राण-प्रतिष्ठा भी करवाना जरूरी होता है। उसके लिये हमें उस नग को शुद्ध जल गंगाजल या कच्चे दूध में धोकर तांबे या सोने में बने हुये गुरू यंत्र के उपर रखकर विधिवत पूजा पाठ करना चाहिये।

देवताओं के नवग्रहों का आव्हान् करके आपको गुरू के मंत्र का जप करना चाहिये। गुरू का मंत्र है- ऊं बृ बृहस्पत्यै नमः। इसके 19000 मंत्र करने चाहिये। उसके बाद विधिपूर्वक हवन भी करना चाहिये तथा गुरू की होरा में गुरूवार को सुबह सीधे हाथ की तर्जनी उंगली में धारण करना चाहिये। यह नग हमारे शरीर के साथ संबंध स्थापित कर लेता है और अपना फल देना आरम्भ कर देता है।

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