वैशाख मास परम पावन मास है। यह भगवान विष्णु का प्रिय मास है, इसलिए इस मास स्नान, तर्पण, मार्जन, पूजन आदि का विशेष महत्व है। वैशाख मास में जब सूर्य मेष राशि का होता है, तब किसी बड़ी नदी, तालाब, तीर्थ, सरोवर, झरने, कुएं या बावड़ी पर निम्नोक्त श्लोक का पाठ कर श्रद्धापूर्वक भगवान विष्णु का ध्यान करते हुए स्नान करना चाहिए। श्लोक ‘‘यथाते माधवो मासोवल्लभो मधुसूदन। प्रातः स्नानेन मे तस्मिन फलदः पापहा भव।। स्नान करने की विधि प्रातः काल उठकर सर्वप्रथम किसी नदी, तालाब, तीर्थ स्थान, कुएं या बावड़ी...
महाशिवरात्रि के दिन अथवा नागपंचमी के दिन किसी सिद्ध शिव स्थल पर कालसर्प योग की शांति करा लेने का अति विशिष्ट महत्व माना जाता है। निरंतर महामृत्युंजय मंत्र के जप से, शिवोपासना से, हनुमान जी की आराधना से एवं भैरवोपासना से यह योग शिथिल पड़ जाता है। श्रावण मास में सोमवार का व्रत करते हुये भगवान शिव से कालसर्प योग के दुष्प्रभावों से बचाने के लिये प्रार्थना करने पर बहुत शांति मिलती है। महा शिवरात्रि की शुभ वेला में संपूर्ण कालसर्प दोष निवारण यंत्र की स्थापना कर, महामृत्युंजय मंत्र का...
शांताकारं भुजगशयनं पद्मनाभं सुरेशं। विश्वाधारं गगनसदृशं मेघवर्ण शुभाङ्गम्।। लक्ष्मीकांतं कमलनयनं योगिभिध्र्यानगम्यं। वन्दे विष्णुं भवभयहरं सर्वलोकैकनाथम्।। जिनकी आकृति अतिशय शांत है, जो शेषनाग की शय्या पर शयन किए हुए हैं, जिनकी नाभि में कमल है, जो सब देवताओं द्वारा पूज्य हैं, जो संपूर्ण विश्व के आधार हैं, जो आकाश के सदृश सर्वत्र व्याप्त हैं, नीले मेघ के समान जिनका वर्ण है, जिनके सभी अंग अत्यंत सुंदर हैं, जो योगियों द्वारा ध्यान करके प्राप्त किये जाते हैं, जो सब लोकों के स्वामी हैं, जो जन्म-मरण रूपी भय को दूर करने वाले हैं,...