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ग्रह योगों में अभीष्ट और अनिष्ट स्थितियां

ग्रह पीड़ा निवारण हेतु - ग्रह योगों में अभीष्ट और अनिष्ट स्थितियां इस शक्ति के अनुकूल एवं प्रतिकूल कारणों से ही बनती है, अतः आद्याशक्ति की उपासना ग्रहों के अनिष्ट परिणामों से रक्षा कर सकती है। सभी लोगों तथा विशेषकर ज्योतिष फलादेश देने वालों को तो शक्ति उपासना बहुत शक्ति प्रदान करती है। आद्या शक्ति की उपासना महाकाली, महालक्ष्मी, महासरस्वती, नवदुर्गा, दशविद्या, गायत्री आदि अनेक रूपों में की जाती है। नवरात्रि के समय शक्ति उपासना का महत्व सभी भारतीय पौराणिक ग्रंथों में बतलाया गया है। जन्म से मृत्युपर्यन्त की स्थिति...
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बुधवार का व्रत साधना और नियम

बुधवार व्रत: व्रत बुध ग्रह को प्रसन्न करने वाला महत्वपूर्ण व्रत है। इस व्रत का पालन किसी भी बुधवार से किया जा सकता है। यह व्रत व्यापारियों को व्यापार में वृद्धि व लाभ प्रदाता, विद्यार्थियों को ज्ञान, बुद्धि व वाक्द्गाक्ति देने वाला, ग्रहस्थी महिलाओं को गृह कार्य में दक्षता प्रदान करने वाला, सेवाकार्य में स्थित देवियों को कार्य कुद्गालता का प्रतीक, वृद्धों को मनः स्थिति में संयम को देने वाला एवं जगत् के मानरूप में जन्मे प्रत्येक जीव को विवेक से संपन्न बनाने वाला है। मनुष्य के पास सबकुछ है,...
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मौन व्रत का महत्व

मौन व्रत भारतीय संस्कृति में सत्य व्रत, सदाचार व्रत, संयम व्रत, अस्तेय व्रत, एकादशी व्रत व प्रदोष व्रत आदि बहुत से व्रत हैं, परंतु मौनव्रत अपने आप में एक अनूठा व्रत है। इस व्रत का प्रभाव दीर्घगामी होता है। इस व्रत का पालन समयानुसार किसी भी दिन, तिथि व क्षण से किया जा सकता है। अपनी इच्छाओं व समय की मर्यादाओं के अंदर व उनसे बंधकर किया जा सकता है। यह कष्टसाध्य अवश्य है, क्योंकि आज के इस युग में मनुष्य इतना वाचाल हो गया है कि बिना बोले रह...
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पंचतत्व का महत्व

ईश्वर यानी भगवान ने अपने अंश में से पांच तत्व-भूमि, गगन, वायु, अग्नि और जल का समावेश कर मानव देह की रचना की और उसे सम्पूर्ण योग्यताएं और शक्तियां देकर इस संसार में जीवन बिताने के लिये भेजा है। मनुष्य, ईश्वर की अनुपम कृति है, इसलिए उसमें ईश्वरीय गुण आनन्द व शांति आदि तो होने ही चाहिये जिससे वह ईश्वर (भगवान) को हमेशा याद रखे। मनुष्य को यदि इन पंचतत्वों के बारे में समझाया जाता तो शायद उसे समझने में अधिक समय लगता, इसलिये हमारे मनीषियों ने इन पंचतत्वों को...
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पुरषोत्तम मास या अधिमास में व्रत

इसे 'अधिमास' और 'मलमास' भी कहते हैं। मलमास की दृष्टि से शुभ कर्मों के वर्जित होने के कारण यह मास निंदित है। परंतु पुरुषोत्तमेति मासस्य नामाप्यस्ति सहेतुकम्। तस्य स्वामी कृपासिन्धुः पुरुषोत्तम उच्यते॥ अहमेवास्य संजातः स्वामी च मधुसूदनः। एतन्नाम्ना जगत्सर्वं पवित्रं च भविष्यति॥ मत्सादृश्यमुपागम्य मासानामधिपो भवेत्। जगत्पूज्यो जगद्वन्द्यो मासोऽयं तु भविष्यति॥ पूजकानां च सर्वेषां दुःखदारिद्र्यखण्डनः॥ भगवान् पुरुषोत्तम इसको अपना नाम देकर इसके स्वामी बन गए हैं। अतः इसकी महिमा बहुत बढ़ गई है। इस पुरुषोत्तम मास में साधना करने से कोई व्यक्ति पापमुक्त होकर भगवान को प्राप्त हो सकता है। यह...
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दुर्गा सप्तशती का पाठ

दुर्गासप्तशती का पाठ दो प्रकार से होता है- एक साधारण व दूसरा सम्पुट। सप्तशती में कुल सात सौ मंत्र हैं। प्रत्येक मंत्र के आरंभ और अंत में इच्छित फल प्राप्ति के उद्देश्य से विशेष मंत्र का उच्चारण किया जाता है। इस प्रकार से सप्तशती के सात सौ मंत्र सम्पुटित करके जपे जाते हैं। ऐसे पाठ को सम्पुट पाठ कहते हैं जिसे काम्य प्रयोगों में विशेष प्रभावशाली समझा जाता है। विभिन्न प्रकार के उद्देश्यों की प्राप्ती हेतु संपुट पाठ में विभिन्न मंत्रों का प्रयोग होता है। इस आलेख में प्रस्तुत है...
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हाथ की रेखाओं से जाने किस देवी देवता की पूजा करें

भारत की सनातन धार्मिक और पूजन परंपरा में देवताओं का मुख्य स्थान है। इनकी संख्या भी हमारे यहां 33 करोड़ बतायी गई है। महादेव शंकर भगवान हों या शक्ति और बल के देवता बजरंग बली हों या फिर मर्यादा पुरुषोम राम हों या नटखट माखन चोर भगवान कृष्ण हों सभी की अपार महिमा का वर्णन हमारे शास्त्रों में किया गया है। पुरुषों की शक्ति और महिमा की अभिव्यक्ति करने वाले इन देवताओं के बाद महिलाओं के शक्ति पुंज की भी व्याख्या हमारे यहां दुर्गा और काली तथा चामुण्डा के रूप...
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