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शनि को कल्याणकारी बनाने के उपाय

शनि शुभ होने पर निम्न उपाय करें: - नीलम रत्न, चांदी की अंगूठी में बनवा कर, मध्यमा अंगुली में, शनिवार के दिन प्रातः पहनें। - नीले रंग की वस्तुओं का उपयोग करें जैसे नीले वस्त्र, चादर, पर्दे आदि। - शनि से संबंधित वस्तुओं (जैसे लोहा, तेल, चमड़ा आदि) का व्यापार करें और शनि के दिन एवं नक्षत्रों का विशेष तौर पर उपयोग करें। - लोहे के बरतन में 7 काली मिर्च, 7 काले चने के दाने, पत्थर का कोयला, 7 दाने उड़द की साबुत दाल, एक चमड़े का टुकड़ा एवं...
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कुंडली में अष्टम चन्द्र

अष्टम चंद्र यानि जन्म कुंडली में आठवें भाव में स्थित चंद्र। आठवां भाव यानि छिद्र भाव, मृत्यु स्थान, क्लेश‘विघ्नादि का भाव। अतः आठवें भाव में स्थित चंद्र को लगभग सभी ज्योतिष ग्रंथों में अशुभ माना गया है और वह भी जीवन के लिए अशुभ। जैसे कि फलदीपिका के अध्याय आठ के श्लोक पांच में लिखा है कि अष्टम भाव में चंद्र हो तो बालक अल्पायु व रोगी होता है। एक अन्य ग्रंथ बृहदजातक में भी वर्णित है कि चंद्र छठा या आठवां हो व पापग्रह उसे देखें तो शीघ्र मृत्यु...
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मकर संक्रांति महत्व

सूर्य के राशि परिवर्तन का समय संक्रांति कहलाता है। सूर्य लगभग एक माह में राशि परिवर्तन कर लेते है। इस प्रकार एक वर्ष में मेष-वृषादि 12 संक्रांति होती है। सूर्य का मकर राशि में प्रवेश करना मकर संक्रांति कहलाता है।मकर संक्रांति को सूर्य दक्षिणायन से उत्तरायण हो जाते है। इसी कारण इस संक्रांति का पुराणों एंव शास्त्रों में बहुत महत्व प्रतिपादित किया है। अयन का अर्थ होता है चलना। सूर्य के उत्तर गमन को उत्तरायण कहते है। उत्तरायण के छह महीनों मे सूर्य मकर से मिथुन तथा दक्षिणायन में सूर्य...
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