भारतीय वैदिक ज्योतिष में विवाह को जीवन का सबसे महत्वपूर्ण संस्कार माना गया है। विवाह केवल दो व्यक्तियों का बंधन नहीं, बल्कि दो परिवारों, संस्कारों और कर्मों का संगम है। कुंडली में यदि ग्रह अनुकूल हों तो विवाह समय पर, सुखद और स्थिर होता है, लेकिन यदि ग्रहों की स्थिति प्रतिकूल हो तो विवाह में देरी, बाधा, टूटे रिश्ते, बार-बार बात बिगड़ना या विवाह के बाद तनाव जैसी समस्याएँ उत्पन्न होती हैं।
विवाह के प्रमुख कारक ग्रहों में गुरु (बृहस्पति) का स्थान सर्वोपरि माना जाता है। गुरु को विवाह, ज्ञान, धर्म, संस्कार, आशीर्वाद और शुभता का ग्रह कहा गया है। विशेष रूप से स्त्री कुंडली में गुरु और पुरुष कुंडली में शुक्र विवाह के मुख्य कारक माने जाते हैं।
नववर्ष 2026 में गुरु ग्रह की चाल कई राशियों और जातकों के विवाह जीवन को प्रभावित करने वाली है। कुछ जातकों के लिए गुरु विवाह के मार्ग को प्रशस्त करेंगे, तो वहीं कुछ लोगों के लिए गुरु ग्रह ही विवाह में सबसे बड़ी बाधा बन सकते हैं।
वैदिक ज्योतिष में गुरु ग्रह का महत्व
गुरु ग्रह को देवगुरु बृहस्पति कहा जाता है। यह ग्रह—
- विवाह में शुभता
- जीवनसाथी का चरित्र
- दांपत्य सुख
- संतान सुख
- सामाजिक स्वीकृति
- परिवार का आशीर्वाद
इन सभी का प्रतिनिधित्व करता है।
यदि कुंडली में गुरु बलवान हो तो—
- विवाह समय पर होता है
- योग्य जीवनसाथी मिलता है
- विवाह के बाद जीवन स्थिर रहता है
लेकिन यदि गुरु—
- अशुभ राशि में हो
- नीच का हो
- पाप ग्रहों से पीड़ित हो
- छठे, आठवें या बारहवें भाव में स्थित हो
तो विवाह में देरी और बाधाएँ निश्चित मानी जाती हैं।
2026 में गुरु ग्रह की स्थिति और गोचर
नववर्ष 2026 में गुरु ग्रह की चाल अत्यंत महत्वपूर्ण रहने वाली है।
2026 में गुरु का गोचर
- वर्ष के अधिकांश भाग में गुरु मिथुन राशि में गोचर करेंगे
- मध्य वर्ष में गुरु की वक्री अवस्था कई जातकों के विवाह योग को रोक सकती है
- गुरु का राहु और शनि से दृष्टि संबंध भी बनेगा
इन्हीं कारणों से 2026 में कुछ राशियों और कुंडलियों के लिए गुरु विवाह में बाधक बन सकते हैं।
2026 में गुरु किन जातकों के विवाह में बाधा बनेंगे?
2026 में गुरु स्वयं मिथुन राशि में स्थित रहेंगे। यह स्थिति सभी मिथुन जातकों के लिए शुभ नहीं कही जा सकती।
विवाह में बाधा के कारण:
- गुरु का सातवें भाव पर कमजोर प्रभाव
- निर्णय लेने में भ्रम
- रिश्तों को लेकर असमंजस
- बार-बार विवाह की बात बनकर टूटना
विशेष रूप से जिन जातकों की कुंडली में—
- गुरु पहले से कमजोर है
- सप्तम भाव पर शनि या राहु की दृष्टि है
उनके लिए 2026 विवाह में विलंब का वर्ष बन सकता है।
कन्या राशि वालों के लिए गुरु का गोचर दशम भाव से होगा, जो विवाह के लिए अनुकूल नहीं माना जाता।
समस्याएँ:
- करियर प्राथमिकता बन जाना
- परिवार की अपेक्षाओं पर खरा न उतर पाना
- रिश्तों में व्यावहारिकता की अधिकता
कन्या राशि की महिलाओं के लिए गुरु की यह स्थिति विशेष रूप से विवाह में देरी का संकेत देती है।
धनु राशि के स्वामी स्वयं गुरु हैं, लेकिन 2026 में गुरु धनु राशि से सप्तम भाव में रहेंगे।
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