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कितना उपुक्त है मंगल दोष शांति

कितना उपुक्त है मंगल दोष शांति

मंगल दोष की वजह से विवाह में देरी हो तो ये उपाय जरूर करने चाहिए। माना जाता है कि इन उपायों को करने से विवाह में आ रही बाधाएं जल्द दूर होती हैं और मनचाही कन्या से विवाह होता है।

जिन जातकों की जन्म कुंडली के 1,4,7 और 12 वें भाव में मंगल होता है, उन्हें मांगलिक दोष होता है। इस दोष के कारण जातक को कई प्रकार की बाधाओं का सामना करना पड़ सकता है जैसे उनके भूमि से संबंधित कार्यो में बाधा आती है। विवाह में विलंब होता है। ऋण से मुक्ति नहीं मिलती, वास्तुदोष उत्पन्न हो सकता है आदि- आदि। इन सब दोषों के शमन के लिए अवन्तिका यानि उज्जैन में मंगल दोष निवारण के लिए विशेष पूजा कराने का विधान है। मंगल ग्रह की जन्म स्थली उज्जैन में पूजा करने से दोष समाप्त हो जाता है।

मंगल की शांति के लिए अवन्तिका में भात पूजा कराने का विधान है। मंगल की क्रूर दृष्टि यहां पूजा करने से कृपा दृष्टि में बदल जाती है। यह पूजा उज्जैन में स्थित श्री अंगारेश्वर महादेव मंदिर में पुरोहितों द्वारा संपन्न कराई जाती है। शास्त्रों के अनुसार भगवान शिव का दही भात का लेप करने से अग्नि शांत(मांगलिक दोष निवारण) होती है। इस प्रक्रिया में भगवान गणपति पूजन, माताजी पूजन, संकल्प, भगवान शिव का अभिषेक, पंचामृत पूजा, भात का पूजन(पंचामृत में उबले हुए भात मिलाकर) शिवलिंग पर लेप किया जाता है।
उज्जैन के 84 मंदिरों में से 43वें मंदिर के रूप में प्रतिष्ठित अंगारेश्वर महादेव मंदिर की प्राचीनता के बारे में यहाँ के पुजारी पं मनीष उपाध्याय बताते हैं कि अंगारक को तपस्या करने का निर्देश भगवान शिव ने दिया था। साथ ही यह भी बताया कि अवन्तिका के महाकाल वन मे खगरता के संगम पर गंगेश्वर के उत्तर में ब्रह्माजी द्वारा स्थापित शिवलिंग है। जिसकी पूजा देवता गंधर्व करते हैं । अंगारक ने यहीं सोलह हजार वर्ष तक तप किया।

उपाध्याय के अनुसार पहले क्षिप्रा का पाट चौड़ा था। इसलिए इस शिवलिंग का पूजन नहीं हो पाता था। वर्ष 1973 की बाढ़ में मंदिर ध्वस्त हो गया था। इसका पुनर्निमाण सन 1980 में हुआ। स्कंध पुराण , अग्नि पुराण, के रूप में गंगारक का ही उल्लेख मिलता है तथा गणेश पुराण मे अंगारक स्तोत्र यहां मंगल दोष निवारणार्थ भात पूजा और अन्य पूजा संपन्न होती हैं। शांत प्रिय और एकाग्र मन से अंगारेश्वर महादेव की पूजा करने पर मनोकामनाएं पूरी होती हेैं। मंगल शांति होने से लाभ मिलता है।

इस पूजा के प्रभाव से भूमि के अटके काम, ऋण मुक्ति, वास्तुदोष, संतान, विवाह में मांगलिक दोष से व्यवधान, व्यापार में रूकावटें आदि का शमन हो जाता हैं ।





—-मंगल दोष शांति के विशेष दान :—-

शास्त्रानुसार लाल वस्त्र धारण करने से व किसी ब्रह्मण अथवा क्षत्रिय को मंगल की निम्न वास्तु का दान करने से जिनमे – गेहू, गुड, माचिस, तम्बा, स्वर्ण, गौ, मसूर दाल, रक्त चंदन, रक्त पुष्प, मिष्टान एवं द्रव्य तथा भूमि दान करने से मंगल दोष दूर होता है | लाल वस्त्र में मसूर दाल, रक्त चंदन, रक्त पुष्प, मिष्टान एवं द्रव्य लपेट कर नदी में प्रवाहित करने से मंगल जनित अमंगल दूर होता है |
—– तुलसी के पौधे को (रविवार को छोड़कर) हर शाम प्रणाम कर उसके पास घी का दीपक जलाएं। तुलसी के मनकों की माला पहनें और भगवान कृष्ण का श्रद्धा से पूजन कीजिए। कृष्ण की एक तस्वीर तुलसी के पौधे के पास भी स्थापित कीजिए।
—-अगर कुंडली में मंगल के कारण विवाह में विलंब हो रहा है तो जेब या पर्स में चांदी का चौकोर टुकड़ा सदा अपने साथ रखें। यह मंगल दोष के प्रभाव को कम कर आपका कार्य सिद्ध कर देगा।
—–जिन लोगों की कुंडली मांगलिक होती है उन्हें प्रति मंगलवार मंगलदेव के निमित्त विशेष पूजन करना चाहिए। मंगलदेव को प्रसन्न करने के लिए उनकी प्रिय वस्तुओं जैसे लाल मसूर की दाल, लाल कपड़े का दान करना चाहिए।
—-जिन लोगों की कुंडली में मंगलदोष है उनके द्वारा प्रतिदिन या प्रति मंगलवार को शिवलिंग पर कुमकुम चढ़ाया जा सकता है। इसके साथ ही शिवलिंग पर लाल मसूर की दाल और लाल गुलाब अर्पित करें। इस प्रकार भी मंगल दोष की शांति हो सकती है।
——शुक्ल पक्ष के मंगलवार को चांदी का एक टुकड़ा लेकर उसे जमीन में गड्ढा खोदकर रख दें। अब उस पर पानी डालें और थोड़ी मिट्टी भी डाल दें। तत्पश्चात इस पर तुलसी का पौधा लगा दें। इस पौधे का ध्यान रखें और नियमित जल आदि डालें। यह उपाय भी मंगल के कुप्रभाव को दूर कर विवाह में बाधाओं का निवारण करता है।
—-शास्त्रों के अनुसार मंगल दोष का निवारण अंगारेश्वर महादेव, उज्जैन (मध्यप्रदेश) में ही हो सकता है। अन्य किसी स्थान पर नहीं। उज्जैन ही मंगल देव का जन्म स्थान है और मंगल के सभी दोषों का निवारण यहीं किए जाने की मान्यता है। मंगलदेव के निमित्त भात पूजा की जाती है। जिससे मंगल दोषों की शांति होती है।
—अगर किसी युवती के विवाह में मंगल की वजह से बाधा आ रही है तो शुक्ल पक्ष के मंगलवार को भगवान राम-सीता व हनुमानजी के चित्र की स्थापना करें और दीपक जलाकर सुंदरकांड का पाठ करें।
—बंदरों व कुत्तों को गुड व आटे से बनी मीठी रोटी खिलाएं |
—– मंगल चन्द्रिका स्तोत्र का पाठ करना भी लाभ देता है |
—– माँ मंगला गौरी की आराधना से भी मंगल दोष दूर होता है |
—– कार्तिकेय जी की पूजा से भी मंगल दोष के दुशप्रभाव में लाभ मिलता है |
—— मंगलवार को बताशे व गुड की रेवड़ियाँ बहते जल में प्रवाहित करें |
—– आटे की लोई में गुड़ रखकर गाय को खिला दें |
—– मंगली कन्यायें गौरी पूजन तथा श्रीमद्भागवत के 18 वें अध्याय के नवें श्लोक का जप अवश्य करें |
—- मांगलिक वर अथवा कन्या को अपनी विवाह बाधा को दूर करने के लिए मंगल यंत्र की नियमित पूजा अर्चना करनी चाहिए।
—- मंगल दोष द्वारा यदि कन्या के विवाह में विलम्ब होता हो तो कन्या को शयनकाल में सर के नीचे हल्दी की गाठ रखकर सोना चाहिए और नियमित सोलह गुरूवार पीपल के वृक्ष में जल चढ़ाना चाहिए |
—– मंगलवार के दिन व्रत रखकर हनुमान जी की पूजा करने एवं हनुमान चालीसा का पाठ करने से व हनुमान जी को सिन्दूर एवं चमेली का तेल अर्पित करने से मंगल दोष शांत होता है |
—– महामृत्युजय मंत्र का जप हर प्रकार की बाधा का नाश करने वाला होता है, महामृत्युजय मंत्र का जप करा कर मंगल ग्रह की शांति करने से भी वैवाहिक व दांपत्य जीवन में मंगल का कुप्रभाव दूर होता है |
—– यदि कन्या मांगलिक है तो मांगलिक दोष को प्रभावहीन करने के लिए विवाह से ठीक पूर्व कन्या का विवाह शास्त्रीय विधि द्वारा प्राण प्रतिष्ठित श्री विष्णु प्रतिमा से करे, तत्पश्चात विवाह करे |
—– यदि वर मांगलिक हो तो विवाह से ठीक पूर्व वर का विवाह तुलसी के पौधे के साथ या जल भरे घट (घड़ा) अर्थात कुम्भ से करवाएं।
—-यदि मंगली दंपत्ति विवाहोपरांत लालवस्त्र धारण कर तांबे के पात्र में चावल भरकर एक रक्त पुष्प एवं एक रुपया पात्र पर रखकर पास के किसी भी हनुमान मन्दिर में रख आये तो मंगल के अधिपति देवता श्री हनुमान जी की कृपा से उनका वैवाहिक जीवन सदा सुखी बना रहता है |
—मांगलिक-दोष दूर करते हैं मंगल के यह 21 नाम।

निम्न 21 नामों से मंगल की पूजा करें—-
1. ऊँ मंगलाय नम:
2. ऊँ भूमि पुत्राय नम:
3. ऊँ ऋण हर्वे नम:
4. ऊँ धनदाय नम:
5. ऊँ सिद्ध मंगलाय नम:
6. ऊँ महाकाय नम:
7. ऊँ सर्वकर्म विरोधकाय नम:
8. ऊँ लोहिताय नम:
9. ऊँ लोहितगाय नम:
10. ऊँ सुहागानां कृपा कराय नम:
11. ऊँ धरात्मजाय नम:
12. ऊँ कुजाय नम:
13. ऊँ रक्ताय नम:
14. ऊँ भूमि पुत्राय नम:
15. ऊँ भूमिदाय नम:
16. ऊँ अंगारकाय नम:
17. ऊँ यमाय नम:
18. ऊँ सर्वरोग्य प्रहारिण नम:
19. ऊँ सृष्टिकर्त्रे नम:
20. ऊँ प्रहर्त्रे नम:
21. ऊँ सर्वकाम फलदाय नम:

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विशेष:— किसी अनुभवी और विद्वान ज्योतिषी से चर्चा करके ही श्री अंगारेश्वर महादेव पर मंगलदोष निवारण के उपाय भट पूजन आदि करना चाहिए। मंगल की पूजा का विशेष महत्व होता है। अपूर्ण या कुछ जरूरी पदार्थों के बिना की गई पूजा प्रतिकूल प्रभाव भी डाल सकती है।

कैसे पहुंचे उज्जैन—–

इंदौर (55 किलोमीटर) निकटतम हवाई अड्डा है. यह भोपाल, मुंबई, दिल्ली और ग्वालियर से जुड़ा है.
इंदौर (55 किलोमीटर)में बस स्टोप है. यह भोपाल, मुंबई, दिल्ली और ग्वालियर से जुड़ा है.

इंदौर (55 किलोमीटर)में रेलवे स्टेशन है. यह भोपाल, मुंबई, दिल्ली और ग्वालियर से जुड़ा है.

क्या करें अगर कुंडली में राहु-मंगल हों साथ-साथ?

ज्योतिष में मंगल और राहु मिल कर अंगारक योग बनाते हैं। लाल किताब में इस योग को पागल हाथी का नाम दिया गया है। अगर यह योग किसी की कुंडली में होता है तो वो व्यक्ति अपनी मेहनत से नाम और पैसा कमाता है। ऐसे लोगों के जीवन में कई उतार चढ़ाव आते हैं।

यह योग अच्छा और बुरा दोनों तरह का फल देने वाला है। ज्योतिष में इस योग को अशुभ माना जाता है। ऐसा माना जाता है कि कुंडली में यह योग होने पर इसकी शांति करवाना चहिए नहीं तो लंबे समय तक परेशानियां बनी रहती हैं। उज्जैन में अंगारेश्वर महादेव मन्दिर में मंगल-राहु अंगारक योग की शांति होती है।



क्या प्रभाव होता है कुंडली के बारह घरों में मंगल-राहु अंगारक योग का?

1- कुंडली के पहले घर में मंगल-राहु अंगारक योग होने से पेट के रोग और शरीर पर चोट का निशान रहता है।
ये उपाय करें- रेवडिय़ां, बताशे पानी में बहाएं।
2- कुंडली के दूसरे भाव में अंगारक योग होने से धन संबंधित उतार चढ़ाव आते हैं। ऐसे लोग धन के मामलों में जोखिम लेने से नहीं घबराते हैं।
ये उपाय करें- चांदी की अंगूठी उल्टे हाथ की लिटील फिंगर में पहनें।
3- जिन लोगों की कुंडली के तीसरे भाव में ये योग होता उनको भाइयों और मित्रों से सहयोग मिलता है और वो लोग मेहनत से पैसा, मान सम्मान कमाते हैं।
ये उपाय करें- घर में हाथी दांत रखें।
4- कुंडली के चौथे भाव में ये योग होने से माता के सुख में कमी आती है और भूमि संबंधित विवाद चलते रहते हैं।
ये उपाय करें- सोना, चांदी और तांबा तीनों को मिलाकर अंगूठी पहनें।
5- कुंडली के पांचवें भाव में अंगारक योग योग जुए, सट्टे, लॉटरी और शेयर बाजार में लाभ दिलाता है।
ये उपाय करें- रात को सिरहाने पानी का बर्तन भरकर रखें और सुबह उठते ही पेड़-पौधों में डालें।
6- जिन लोगों की कुंडली के छठे घर में मंगल-राहु एक साथ होते हैं ऐसे लोग ऋण लेकर उन्नति करते हैं। अच्छे वकील और चिकित्सक भी इसी योग के कारण बनते हैं।
ये उपाय करें- कन्याओं को दूध और चांदी का दान दें।

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