करवा चौथ व्रत
– पति की लंबी आयु के लिए किया जाता है व्रत
– संकल्प शक्ति का प्रतीक है करवा चौथ व्रत
– अखंड सौभाग्य की कामना का व्रत है करवा चौथ
– कार्तिक माह में कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को किया जाता है व्रत
————————————————————-
पूजन सामग्री
– धूप, दीप, कपूर, रोली, चंदन, सिंदूर
– काजल, पुष्प, मेहंदी, चूड़ी, बिछिया, बिंदी
– कुमकुम, सिंदूर, कंघी, महावर
– बाजार में उपलब्ध सुहाग पुड़ा
– खीर, पुआ, फल, मिठाई
– सूखा मेवा, पूड़ी और गुड का हलवा
——————————————————-
श्री चंद्र अर्घ्य
– चंद्रमा का चित्र अग्निकोण में स्थापित करें
– चावल को भिगो कर पीस लें
– पिसे चावल का गोल आकार बनाएं
– चापल की पीठी से 5 लंबी डंडियां बनाएं
– गोलाकार चंद्र के ऊपर पूर्व से पश्चिम तक 4 डंडियां लगाएं
– पांचवी डंडी थोड़ी चौड़ी बनाएं, आकृति चौथ के चांद जैसी होना चाहिए
– चंद्र देव का पूजन करें
– चंद्र को अर्घ्य पूजा सम्पन्न करें
– चंद्र स्तुति, पूजन, आराधना विशेष फलदायी होती है
————————————————————-
– सौभाग्यवती स्त्रियां लाल वस्त्र पहनें
– हाथों में मेहंदी लगाएं
– सोलह श्रृंगार करें
– शुभ मुहूर्त में भगवान शिव और मां पार्वती की पूजा करें
– करवा चौथ की कथा सुनें
– माता पार्वती को सुहाग सामग्री चढ़ाएं
————————————————————–
‘करवा चौथ’ शुभ मुहूर्त
– शनिवार शाम 7:42 पर करें पूजा
– चंद्रोदय का समय शाम 7:42
– चतुर्थी तिथि शनिवार शाम 6:38 से रविवार शाम 4:55 बजे तक
——————————————————–
करवा चौथ पूजा विधि
– सुबह स्नान के बाद व्रत का संकल्प लें
– घर की दीवार पर गेरू से फलक बनाकर पिसे चावलों के घोल से करवा चित्र बनाएं
– आठ अठावरी, हलवा, पक्के पकवान बनाएं
– पीली मिट्टी से गौरी बनाएं साथ ही गणेश जी बनाकर गौरी की गोद में बिठाएं
– गौरी को लकड़ी के आसन पर बिठाएं, चौक बनाकर आसन को उस पर रखें
– गौरी को चुनरी ओढ़ाएं
– सुहाग सामग्री से गौरी का श्रृंगार करें
– जल से भरा हुआ लोटा रखें
– करवा में गेहूं और ढक्कन में शक्कर का बूरा भर दें, दक्षिणा रखें
– रोली से करवा पर स्वास्तिक बनाएं
– गौरी-गणेश और करवा की पूजा करें
– पति की दीर्घायु की कामना करें
– करवा पर 13 बिंदी रखें
– गेहूं या चावल के 13 दाने हाथ में लेकर करवा चौथ की कथा सुनें
– करवा पर हाथ घुमाकर सास के पैर छूकर आशीर्वाद लें और करवा उन्हें दे दें
– रात्रि में चंद्रमा निकलने के बाद छलनी की ओट से उसे देखें और चंद्रमा को अर्घ्य दें
– पति से आशीर्वाद लें
– पति को भोजन कराएं और स्वयं भी भोजन करें
———————————————–
पति की आयु होगी लंबी
नमः शिवायै शर्वाण्यै सौभाग्यं संतति शुभाम्।
प्रयच्छ भक्तियुक्तानां नारीणां हरवल्लभे॥
———————————————————
16 श्रृंगार में क्या है ?
– सिंदूर
– काजल
– मेहंदी
– शादी का विशेष परिधान
– गजरा
– टीका
– नथ
– कानों के कुंडल
– मंगल सूत्र
– हार
– बाजूबंद
– चूड़ियां या कंगन
– अंगूठी
– कमरबंद
– बिछुएं
– पायल
—————————————————————–
काजल क्यों जरूरी ?
– आंखों की सुंदरता बढ़ती है
– स्त्रियां पर बुरी नजर का कुप्रभाव नहीं पड़ता
– आंखों संबंधी रोगों से बचाव होता है
मेहंदी क्यों जरूरी ?
– मेहंदी के बिना शृंगार अधूरा माना जाता है
– मेहंदी जितनी अच्छी रचेगी, पति-पत्नी के संबंध उतने ही मधुर होंगे
लाल जोड़ा क्यों जरूरी ?
– लाल रंग सुहाग का प्रतीक
– दुल्हन को विवाह में लाल रंग का ही जोड़ा पहनना चाहिए
– धार्मिक कर्म में पत्नी को लाल परिधान पहनना चाहिए
बिंदी का महत्व
– सुहागिन स्त्री को बिंदी जरूर लगानी चाहिए
– लाल और गोल बिंदी सबसे शुभ
– कुमकुम या सिंदुर से माथे पर लाल बिंदी जरूर लगाना चाहिए
– ऐसा करने से परिवार की समृद्धि बढ़ती है
बिंदी लगाने के लाभ
– बिंदी लगाने से मन एकाग्र होता है
– मन शांत रहता है
– सिरदर्द कम होता है
– चेहरे, गर्दन, पीठ, ऊपरी शरीर की मांसपेशियों को आराम मिलता है
– अनिद्रा की समस्या दूर होती है
– जहां बिंदी लगाई जाती है, उस जगह की नसें और आंखों की नसों का होता है संबंध
– झुर्रियां कम दिखाई देती हैं
– चेहरे की मांसपेशियों में रक्त प्रवाह शुरू हो जाता है, जिससे स्किन टाइट और पोषित होती है
मंगलसूत्र का महत्व
– सौभाग्यवती स्त्री की सबसे बड़ी निशानी है मंगलसूत्र
– विवाह के बाद मंगलसूत्र पहनना अनिवार्य
– मंगलसूत्र में काले मोती शिव और सोना माता पार्वती का प्रतीक
– स्त्री को बुरी नजर से बचाता है मंगलसूत्र
– काले मोती पति-पत्नी और परिवार को बुरी नजर से बचाते हैं
– मंगलसूत्र पहनने वाली महिला और उसके पति पर शिव कृपा बनी रहती है
आप इस लेख का आधा भाग पढ़ चुके हैं
आगे पढ़ने के लिए लॉगिन करें। खाता बनाना पूरी तरह निःशुल्क है – Google या मोबाइल OTP से, एक मिनट में।
लॉगिन करें और आगे पढ़ें नया यूज़र? निःशुल्क खाता बनाएँआगे पढ़ने के लिए लॉगिन करें
इस लेख का 50% भाग आपने निःशुल्क पढ़ लिया। बाकी लेख, और Future For You के सभी ज्योतिष, वास्तु व राशिफल लेख पढ़ने के लिए बस एक बार लॉगिन करें।
- पूरी तरह निःशुल्क – कोई शुल्क नहीं
- Google से एक क्लिक, या मोबाइल OTP
- लॉगिन के बाद सीधे इसी लेख पर वापस