Astrologymahakal dham amleshwarधर्म उपाय लेख

 श्री महाकाल धाम अमलेश्वर में 16 जनवरी 2024 से तीन दिनों तक चलेगी प्राण-प्रतिष्ठा महोत्सव…

59views

हवन-पूजन और वैदिक मंत्रोच्चार से रच रहा भक्ति का संसार

————–

 महाकाल धाम अमलेश्वर में 16 जनवरी 2024 से तीन दिनों तक चलेगी प्राण-प्रतिष्ठा महोत्सव

—————

रायपुर। रायपुर से लगे अमलेश्वर स्थित श्री महाकाल धाम में तीन दिनी प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव की तैयारियां जोरों पर है। छत्तीसगढ़ ही नहीं मध्यप्रदेश, ओडिशा, महाराष्ट्र समेत देशभर के भक्तों की आस्था के इस केंद्र में तीन नए विग्रहों की प्राण-प्रतिष्ठा और प्रतिस्थापना समारोह अगले महीने यानी 16 जनवरी 2024 से शुरू हो रही है। इस महोत्सव में देशभर के हजारों भक्त शामिल होंगे। श्री महाकाल धाम अमलेश्वर के सर्वराकार पंडित प्रियाशरण त्रिपाठी बताते हैं कि श्री महाकाल धाम अमलेश्वर में महोत्सव के प्रथम दिवस यानी 16 जनवरी 2024 को जलाधिवास, वेदी पूजन एवं हवन होगा। द्वितीय दिवस यानी 17 जनवरी 2024 को अन्नाधिवास, वेदी पूजन एवं हवन होगा। इसके बाद तृतीय दिवस 18 जनवरी 2024 को वेदी पूजन, मंदिर प्राण प्रतिष्ठा पूरी होगी। इसके बाद हवन, आरती होगी और सभी भक्तों के लिए महाप्रसादी (लंगर) का आयोजन भी किया गया है। इस प्राण-प्रतिष्ठा महोत्सव के दौरान तीन दिनों तक संध्या काल में विख्यात भजन गायकों की भक्तिमय प्रस्तुति होगी। श्री महाकाल धाम अमलेश्वर के सर्वराकार पंडित प्रियाशरण त्रिपाठी ने भक्तों से आग्रह किया है कि वे तीन दिनों तक श्री महाकाल धाम अमलेश्वर में होने वाले इस पवित्र आयोजन के साक्षी बनें। उन्होंने सभी भक्तों से इस कार्यक्रम में अपनी उपस्थिति की स्वीकृति प्रदान कर इस कार्यक्रम की गरिमा बढ़ाने के साथ भगवान श्री के कृपापात्र बनने का आग्रह किया है।

ALSO READ  क्यों लगता है पितृ दोष, जानें इसकी वजह

हर रोज सैकड़ों भक्त पहुंचते हैं महाकाल धाम

श्री महाकाल धाम अमलेश्वर के गर्भगृह में विराजे भगवान भोलेशंकर के साथ ही परिक्रमा में श्री गणेश जी महाराज, कैलाश अधिपति शंकर और महामाया चतृभुजी दुर्गा की प्रतिमा प्रतिस्थापित है। धाम के द्वार पर नंदी और सामने ही अमलेश्वर क्षेत्र अधिपति भगवान शनि की अद्भुत प्रतिमा है। श्री महाकाल धाम अमलेश्वर में प्रतिदिन वैदिक मंत्रोच्चार के साथ सैकड़ों लोग पूजा-पाठ कराने के लिए पहुंच रहे हैं। यहां फलाश विधि के द्वारा नारायण नागबली, कालसर्प की पूजा कराई जाती है। साथ ही विवाह में आने वाली बाधाओं के निवारण के लिए कुंवारे युवक और युवतियों का अर्क विवाह और कुंभ विवाह भी संपन्न कराया जाता है।

ALSO READ  कैसे पता करें कि घर में पितृ दोष है की नहीं ?