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आखिर क्यों पवित्र माना जाता है गंगाजल? जानें इससे जुड़े जरूरी नियम और महाउपाय

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पवित्र गंगा जल?

भारत को नदियों की भूमि कहा जाता है, और इन सभी नदियों में यदि किसी एक नदी को “मां” का दर्जा प्राप्त है, तो वह है गंगा नदी। गंगा केवल एक नदी नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, आस्था, मोक्ष, जीवन और मृत्यु – सभी से गहराई से जुड़ी हुई है।
हजारों वर्षों से गंगा जल को पवित्र, अविनाशी, शुद्धिकरण करने वाला और मोक्षदायिनी माना जाता रहा है। आश्चर्य की बात यह है कि वैज्ञानिक शोध भी गंगा जल की विशेषताओं को पूरी तरह नकार नहीं पाए हैं।

1. गंगा का धार्मिक महत्व

सनातन धर्म में गंगा का स्थान :  सनातन परंपरा में मां गंगा और उनके अमृत जल का बहुत ज्यादा महत्व माना गया है. ​गंगा जल की पवित्रता और महत्ता को इस तरह से समझा जा सकता है कि यह एक सनातनी व्यक्ति के साथ जन्म से लेकर मृत्यु तक जुड़ा रहता है. जीवन से जुड़े सभी दोष को दूर करने और सुख-सौभाग्य बढ़ाने वाली मां गंगा के बारे में कहा जाता है उनके दर्शन मात्र से ही व्यक्ति को मोक्ष मिल जाता है.

2. पौराणिक कथा: गंगा का पृथ्वी पर अवतरण

राजा भगीरथ और गंगा अवतरण :  पौराणिक कथा के अनुसार, राजा भगीरथ की कठोर तपस्या से प्रसन्न होकर देवी गंगा स्वर्ग से पृथ्वी पर अवतरित हुईं, ताकि राजा सगर के भस्म हुए 60,000 पुत्रों को मोक्ष मिल सके; उनका प्रचंड वेग नियंत्रित करने के लिए भगवान शिव ने उन्हें अपनी जटाओं में धारण किया और फिर धीरे-धीरे पृथ्वी पर उतारा, जिससे गंगा ‘भागीरथी’ कहलाईं और धरती को पवित्र किया|

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3. गंगा जल और मोक्ष का संबंध

मृत्यु के समय गंगा जल : गंगा जल और मोक्ष का गहरा संबंध है; मान्यता है कि गंगा में स्नान, गंगाजल का सेवन और मरने के बाद अस्थियों का गंगा में विसर्जन करने से मनुष्य के सभी पाप धुल जाते हैं और उसे जन्म-मरण के चक्र से मुक्ति (मोक्ष) मिलती है

4. गंगा जल की वैज्ञानिक विशेषताएँ

गंगा जल खराब क्यों नहीं होता गंगा जल की वैज्ञानिक विशेषताएँ हैं किइसमें बैक्टीरिया को मारने वाले बैक्टीरियोफेज वायरस होते हैं, जिससे यह शुद्ध रहता है, इसमें ऑक्सीजन की मात्रा अधिक होती है, और इसमें मौजूद खनिज व जड़ी-बूटियाँ इसे प्राकृतिक रूप से शुद्ध करने व स्वास्थ्य लाभ देने की क्षमता देती हैं, जिससे यह जल्दी खराब नहीं होता और बीमारियों से बचाने में मददगार है

5. गंगा जल में औषधीय गुण

आयुर्वेद में गंगा जल :  इसमें बैक्टीरियोफेज (Bacteriophage) नामक वायरस होते हैं जो केवल बुरे बैक्टीरिया को खत्म करते हैं, जिससे पानी शुद्ध रहता है और यह एंटीबायोटिक जैसा असर करता है। इसमें बैक्टीरियोफेज (Bacteriophage) नामक वायरस होते हैं जो केवल बुरे बैक्टीरिया को खत्म करते हैं, जिससे पानी शुद्ध रहता है और यह एंटीबायोटिक जैसा असर करता है। यह अपनी उच्च शुद्धिकरण क्षमता के लिए जाना जाता है, जो प्रदूषण को तेजी से खत्म करता है

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6. आध्यात्मिक दृष्टि से गंगा जल

ऊर्जा और कंपन (Vibrations) :  गंगा स्नान या गंगाजल का स्मरण मात्र व्यक्ति के जन्म-जन्मांतर के पापों को धो देता है और उसे मोक्ष (जन्म-मृत्यु के चक्र से मुक्ति) दिलाता है। घर में छिड़कने से सकारात्मकता आती है और नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है। मृत्यु के समय मुख में गंगाजल की बूंदें डालने से आत्मा को शांति और स्वर्ग की प्राप्ति होती है।

7. पूजा-पाठ में गंगा जल का महत्व

क्यों आवश्यक है गंगा जल : जिसका उपयोग पूजा स्थल, पूजन सामग्री और घर के शुद्धिकरण के लिए किया जाता है. घर के कोनों में छिड़कने से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और शांति का वातावरण बनता है, बुरे सपने भी नहीं आते.इसमें ब्रह्मा, विष्णु और शिव तीनों देवताओं का वास माना जाता है,  जिससे पूजा सफल और फलदायी होती है.

8. गंगा जल और कुंभ मेला

कुंभ का आधार : गंगा, यमुना और सरस्वती के संगम पर होता है  करोड़ों लोग स्नान करते हैं कुंभ स्नान से जन्म-जन्मांतर के पाप नष्ट होते हैं

 

 

9. घर में गंगा जल रखने के नियम 

  • हिंदू मान्यता के अनुसार गंगाजल को हमेशा तांबे, पीतल आदि धातु के पात्र में और पवित्र स्थान पर रखना चाहिए. गंगा जल को प्लास्टिक के बर्तन में नहीं रखना चाहिए.
  • गंगा जल को घर के उत्तर-पूर्व दिशा में रखना चाहिए.
  • गंगा जल को कभी भी अंधेरे वाले स्थान पर हीं रखना चाहिए.
  • गंगाजल को कभी भी अपवित्र हाथों से स्पर्श नहीं करना चाहिए.
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10. गंगाजल के उपाय 

  • यदि आपको लगता है कि आपके घर में नकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है तो आपको प्रतिदिन घर के मुख्य द्वार से प्रारंभ करके प्रत्येक कोने में स्नान करने के बाद गंगाजल छिड़कना चाहिए.
  • यदि आप भगवान शिव के साधक हैं और उनकी कृपा पाना चाहते हैं तो आप गंगाजल में बेलपत्र डालकर शिवलिंग पर अर्पित करकें. इस उपाय से आपके जीवन से जुड़ी सभी अड़चनें दूर और शिव कृपा प्राप्त होगी
  • यदि आप रोग-शोक के कारण परेशान चल रहे हैं तो प्रतिदिन अपने नहाने के पानी में थोड़ा सा गंगाजल मिलाकर स्नान करें.
  • यदि आपको लगता है कि आपके बच्चे को अक्सर नजर लग जाती है या फिर वह अक्सर सोते समय चौंक कर उठ जाता है तो आप उसके बिस्तर पर प्रतिदिन गंगाजल छिड़कर सुलाएं.
निष्कर्ष

गंगा जल की पवित्रता केवल एक धार्मिक मान्यता नहीं, बल्कि: पौराणिक कथाओं ,वैज्ञानिक तथ्यों , आयुर्वेदिक गुणों , आध्यात्मिक अनुभवों  का अद्भुत संगम है। 
गंगा जीवन देती है पाप हरती है मोक्ष प्रदान करती है  इसीलिए सदियों से भारतीय जनमानस में यह विश्वास अडिग है कि — गंगा जल केवल जल नहीं, अमृत है