ॐ ह्रीं बं बटुकाय आपदुद्धारणाय कुरु कुरु बटुकाय बं ह्रीं ॐ स्वाहा”
यह मंत्र भगवान बटुक भैरव का अत्यंत प्रभावशाली आपदुद्धारण (आपत्ति नाशक) मंत्र है। यह मंत्र विशेष रूप से संकट, भय, बाधा, दुष्ट शक्तियों, अकारण मुकदमे, शत्रु बाधा, और भूत-प्रेत दोष से रक्षा हेतु जपा जाता है।
🌒 मंत्र का संक्षिप्त अर्थ:
ॐ ह्रीं बं — बीज मंत्र हैं जो चेतना को जाग्रत करते हैं और शक्ति का आह्वान करते हैं।
बटुकाय — बाल रूप वाले भैरव को नमन।
आपदुद्धारणाय — आपदाओं (संकटों) से उबारने वाले।
कुरु कुरु — शीघ्र कार्यान्वयन हेतु आदेश।
स्वाहा — समर्पण और आह्वान की पूर्णता।
🧘♂️ जाप विधि (Japa Vidhi)
✅ कब करें?
रात्रि काल सर्वोत्तम माना गया है, विशेषतः रात 9 से 12 बजे के बीच।
लेकिन यदि रात्रि में करना संभव न हो तो ब्राह्म मुहूर्त (प्रातः 4 से 6 बजे) भी उपयुक्त है।
✅ कैसे करें?
स्नान कर शुद्ध वस्त्र पहनें।
अपने सामने बटुक भैरव जी का चित्र या मूर्ति रखें।
दीपक (घी या तिल तेल) जलाएं।
कुछ पुष्प, कपूर, चन्दन आदि अर्पित करें।
आसन पर बैठकर रुद्राक्ष की माला से जाप करें।
पूर्व दिशा या दक्षिण दिशा की ओर मुख रखें।
📿 जाप की संख्या:
उद्देश्य जाप की संख्या अवधि
सामान्य शांति हेतु 108 बार प्रतिदिन
विशेष संकट से मुक्ति 1008 बार 11 दिन
तांत्रिक बाधा/कालसर्प दोष 5 माला (540 बार) 21 दिन
📅 कितने दिन करें?
सामान्य सुरक्षा व शांति हेतु: प्रतिदिन 108 बार 21 दिन या 40 दिन तक करें।
विशेष अनुष्ठान: मंगलवार या शनिवार से आरंभ कर 11, 21 या 40 दिन तक नियमित करें।
🚫 सावधानियाँ:
जाप के दौरान मौन रखें या एकांत में जाप करें।
माला का उपयोग करते समय मध्यमा और अंगूठा से माला घुमाएँ, तर्जनी अंगुली का उपयोग न करें।
जाप के पश्चात कृपया भोजन आदि न करें, पहले कुछ समय ध्यान करें या ‘जय बटुक भैरव’ बोलें।
🔱 अतिरिक्त उपाय:
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