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नए ग्रहों एवं राशियों की खोज पर ज्योतिष पर प्रभाव

हाल ही में प्लूटो के आगे 10वें ग्रह की खोज की गई है। खगोलज्ञों ने कैलिफोर्निया की पालोमर वेधशाला में सेडना नामक 10वें ग्रह का पता लगाया है। यह ग्रह पृथ्वी से 13 अरब कि.मी. दूर है। इसका व्यास लगभग 1200 कि.मी. है। इसका रंग मंगल से भी अधिक लाल है। प्लूटो की तुलना में सूर्य से इसकी दूरी तीन गुना अधिक है और आकार में लगभग उससे आधा है। दशम ग्रह की खोज ने एक बार फिर ज्योतिषियों को झकझोड़ डाला है और उन्हें इस पर पुनर्विचार करने को...
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ब्रह्माण्ड की उत्पत्ति

विष्णु पुराण में कहा गया है की अव्यक्ताद्व्यक्तयः सर्वाः प्रभवन्त्यहरागमे। रात्र्यागमे प्रलीयन्ते तत्रैवाव्यक्तसंज्ञके।। संपूर्ण चराचर भूतगण ब्रह्मा के दिन के प्रवेशकाल में अव्यक्त से अर्थात् ब्रह्मा के सूक्ष्म शरीर से उत्पन्न होते हैं और ब्रह्मा की रात्रि के प्रवेशकाल में उस अव्यक्त नामक ब्रह्मा के सूक्ष्म शरीर में लीन हो जाते हैं। जिस प्रकार समुद्र में बुलबुले हर क्षण पैदा होते रहते हैं और उसी में विलय होते रहते हैं इसी प्रकार ब्रह्मांड में आकाशीय पिंड उत्पन्न होकर, समाप्त होते रहते हैं। जब वे उत्पन्न होते हैं तो वे किसी...
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श्री कृष्ण जीवन लीला

श्री कृष्ण का जन्म मथुरा में, भाद्र कृष्ण अष्टमी की मध्य रात्रि को, रोहिणी नक्षत्र में, 21 जुलाई, 3228 ई. पू. को हुआ। कृष्ण-देवकी की वह 8वीं संतान थे। जन्म के समय कारागार के पट स्वयं खुल गये एवं कंस से रक्षा के लिए उनके पिता वसुदेव उन्हें, एक टोकरी में रख कर, यमुना पार नंद गांव में छोड़ आये। बाल लीलाएं उन्होंने उसी नंद गांव में ही कीं, जिनमें पूतना वध, कालिय मर्दन, माखन चोरी, सुदामा से मित्रता, गोपियों के साथ रास लीलाएं आदि प्रमुख हैं। अपनी युवावस्था में...
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कर्म और भाग्य

प्रकृति ने मनुष्य को एक अनोखा गुण दिया है - विचार। इसी के कारण मनुष्य अन्य जीव-जंतुओं से भिन्न है और इसी कारण उसे हमेशा यह जानने की उत्कंठा रही है कि वह कौन है? अंतरिक्ष क्या है? समय क्या है? पदार्थ क्या है? आत्मा क्या है आदि? एक अहम् प्रश्न यह भी रहता है कि मनुष्य के शरीर छोड़ने के पश्चात क्या होता है? क्या यह जीवन-मृत्यु का चक्र है, या जीवन के साथ ही एक अध्याय समाप्त हो जाता है? क्या मनुष्य कुछ भी करने में सक्षम है?...
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भगवत् प्राप्ति साधन

प्रत्येक व्यक्ति की अभिलाषा रहती है कि वह भगवान के दर्शन कर ले। इसके लिए अनेक साधन बताए गए हैं- अनेक प्रकार के योग हैं, अनेक धर्म हैं लेकिन सब में एक वस्तु आम है, वह है अनन्यता- अर्थात् सब वस्तुओं में भगवत् स्वरूप का अहसास करना- सब कर्मों में और उसके फलों में उसकी इच्छा का अहसास करना। कहते हैं, वह एक था। उसने चाहा कि मैं एक से अनेक हो जाऊं और वह संसार रूप में अनेक हो गया और इसमें उसने काम, क्रोध, लोभ मद, मोह व...
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राम और राम सेतु

चतुर नल और नील ने सेतु बांधा। श्रीराम जी की कृपा से उनका यह यश सर्वत्र फैल गया। जो पत्थर स्वयं डूबते हैं और दूसरों को डुबा देते हैं, वे ही जहाज के समान हो गए।। हिंदू धर्म में एक ही आदर्श एवं मर्यादा पुरुष हैं - पुरुषोत्तम श्री राम। श्री राम का जन्म रामनवमी के दिन पुनर्वसु नक्षत्र में अभिजित मुहूर्त में अयोध्या में हुआ। उस समय अधिकांश ग्रह उच्च या स्वराशि में स्थित थे। श्री राम की जीवन लीला का चित्रण हमारे ग्रंथ रामायण में विस्तृत रूप से...
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धन,पद और प्रतिष्ठा की हानि क्यों ? जाने कुंडली से

प्रत्येक मनुष्य के जीवन में शुभ अवसरों के संग अशुभ अवसर भी आते हैं, जिनके कारण वह आर्थिक, सामाजिक, राजनैतिक या पारिवारिक रुप से कुछ न कुछ कष्ट अवश्य झेलता है। ऐसे कष्टों से वह मनुष्य घोर उदासी, निराशा और विषाद की धुध से त्रस्त हाकर अपने जीवन को रसहीन, सारहीन, निर्रथक और बेजान जानकर अवसाद से ग्रस्त हो जाता है या आत्महत्या की ओर प्रेरित होने लगता है। ऐसे घातक समय के कारण और निवारण का बोध जातक की कुंडली के ज्योतिषीय अध्ययन से सहज ही हो सकता है।...
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जन्मांग में आपका धन एवं आमदनी का साधन

जन्मांग में आपका धन एवं आमदनी का साधन पुर्नजन्म एवं कर्म फल का सिंद्धांत अकाट्य है, जन्मांग से यही परिलक्षित होता है। जन्मलग्न, सूर्य लग्न और चंद्र लग्न से श्रेष्ठ भाव फल की प्राप्ति धनागम को सुनिश्चित करतीहै। किस योग से किस जन्म लग्न में और किन ग्रहों से धन प्राप्त होता है,जानने के लिए पढ़िए यह लेख। सनातन धर्म संस्कृति में पुनर्जन्मऔर कर्मफल योग का सिद्धांतसर्वमान्य है।हर प्राणी पूर्व जन्मार्जित कर्म फलभोग के लिये निश्चित लग्न एवं ग्रहयोग में भूतल पर जन्म लेता है। पापकर्म एवं दुष्कर्म यदि पूर्व...
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