(शिव कृपा, रोगों का नाश, भय निवारण, तीर्थ-तुल्य पुण्य एवं आध्यात्मिक उत्थान के लिए) जबरदस्त उपाय
॥ द्वादश ज्योतिर्लिंग स्तोत्र पुरश्चरण साधना विधि ॥ (शिव कृपा, रोग नाश, भय-निवारण, तीर्थफल-समान पुण्य व आत्मिक उत्थान हेतु) 🔱 1. क्या है "पुरश्चरण"? पुरश्चरण का अर्थ है — किसी स्तोत्र या मंत्र की नियत संख्या में जप/पाठ के साथ साधना, ध्यान, हवन, तर्पण और भोजन आदि का समुच्चय। इससे स्तोत्र की पूर्ण शक्ति (सिद्धि) साधक को प्राप्त होती है। 🕉 2. द्वादश ज्योतिर्लिंग स्तोत्र – परिचय: यह आदि शंकराचार्य रचित स्तोत्र है, जिसमें भारत के १२ प्रमुख शिवलिंगों का स्तवन है। इसका नित्य जप तीर्थस्नान, दान, व्रत और लिंगदर्शन...