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चरावेती-चरावेती प्रचलाम्ह निरंतरम् – केतु के अधीन पौरूष्र्य –

निरंतर चलायमान रहने अर्थात् किसी जातक को अपने जीवन में निरंतर उन्नति करने हेतु प्रेरित करने तथा बदलाव हेतु तैयार…

admin1 अगस्त 20182 मिनट

विवाह का समय निर्धारण या विलंब योग को दूर करने का उपाय –

बदले और बदलते हुए परिवेष में विवाह एक चिंता का विषय है। ज्यादातर युवा और उनके अभिभावक कैरियर को प्राथमिकता…

admin8 जुलाई 20181 मिनट

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