कछुआ रिंग पहनते समय भूलकर भी ना करें ये गलती? फायदे की जगह हो सकता है नुकसान, जानें इसे पहनने के नियम

भारतीय ज्योतिष और वास्तु शास्त्र में कछुए (Tortoise) को अत्यंत शुभ, दीर्घायु, स्थिरता और धन-समृद्धि का प्रतीक माना गया है। समुद्र मंथन में भगवान विष्णु का कूर्म अवतार कछुए के रूप में ही हुआ था, इसलिए कछुआ आध्यात्मिक दृष्टि से भी बहुत शक्तिशाली माना जाता है।
आज के समय में बहुत से लोग कछुआ रिंग पहनते हैं ताकि जीवन में धन, सुख-शांति और स्थिरता बनी रहे।
लेकिन क्या आप जानते हैं कि कछुआ रिंग को गलत तरीके से पहनना फायदे की जगह नुकसान भी पहुँचा सकता है?
गलत धातु, गलत उंगली, गलत दिशा या बिना शुद्धिकरण के पहनी गई कछुआ रिंग व्यक्ति के जीवन में आर्थिक हानि, मानसिक तनाव और कार्यों में रुकावट पैदा कर सकती है।
कछुआ रिंग का पौराणिक और आध्यात्मिक महत्व
हिंदू धर्मग्रंथों के अनुसार, जब देवताओं और असुरों ने समुद्र मंथन किया, तब मंदराचल पर्वत को स्थिर रखने के लिए भगवान विष्णु ने कूर्म अवतार धारण किया।
इस कारण कछुआ—
- स्थिरता
- धैर्य
- दीर्घायु
- समृद्धि
- कर्मों में संतुलन
का प्रतीक माना जाता है।
वास्तु शास्त्र में भी कछुए को जल तत्व और उत्तर दिशा से जोड़ा गया है, जो धन के देवता कुबेर की दिशा मानी जाती है।
वास्तुशास्त्र के अलावा चाइनीज़ फेंगशुई में भी कछुए को धन आकर्षित करने और सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है, लेकिन यदि इसे सही तरीके से न पहना जाए, तो यह दुर्भाग्य का कारण बन सकता है। इस लेख में हम जानेंगे कछुआ रिंग पहनने के नियम और इससे जुड़ी सावधानियां।
कछुआ रिंग पहनने के फायदे
कछुआ रिंग को सही विधि से पहनने पर—
- धन आगमन के नए स्रोत बनते हैं
- व्यापार में स्थिर लाभ मिलता है
- आर्थिक उतार-चढ़ाव कम होता है
जो लोग—
- अत्यधिक तनाव में रहते हैं
- जल्दी घबरा जाते हैं
- निर्णय लेने में अस्थिर रहते हैं
उनके लिए कछुआ रिंग अत्यंत लाभकारी मानी जाती है।
3. करियर और व्यवसाय में स्थिरता
कछुआ धीमी लेकिन स्थिर गति का प्रतीक है।
यह रिंग—
- नौकरी में स्थायित्व
- प्रमोशन के योग
- व्यापार में लंबे समय का लाभ
प्रदान करती है।
कछुआ रिंग—
- बुरी नजर
- नकारात्मक सोच
- ग्रहों की अशुभ ऊर्जा
से व्यक्ति की रक्षा करती है।

कछुआ रिंग पहनने के सही नियम
कछुआ रिंग हमेशा—
- चांदी (Silver) – सबसे श्रेष्ठ
- पंचधातु – सामान्य फलदायक
- सोना (Gold) – केवल विशेष कुंडली में
धारण करनी चाहिए।
❌ लोहे या नकली धातु की कछुआ रिंग नुकसानदेह हो सकती है।
2. कछुए का मुख किस दिशा में हो?
👉 यह सबसे बड़ी भूल होती है।
- कछुए का मुख आपकी हथेली (अंदर की ओर) होना चाहिए
- बाहर की ओर मुख होने से धन बाहर जाने लगता है
यह नियम न मानने पर आर्थिक हानि हो सकती है।
3. किस उंगली में पहनें कछुआ रिंग?
सामान्यतः—
- छोटी उंगली (कनिष्ठिका) – सर्वोत्तम
- कुछ मामलों में अनामिका भी उचित मानी जाती है
❌ अंगूठे या तर्जनी में पहनना अशुभ माना जाता है।
- पुरुष – दाहिने हाथ में
- महिलाएँ – बाएं हाथ में
यह नियम ऊर्जा संतुलन के लिए जरूरी है।
कछुआ रिंग पहनने के लिए श्रेष्ठ दिन—
- शुक्रवार
- गुरुवार
शुभ समय—
- प्रातः सूर्योदय के बाद
- ब्रह्म मुहूर्त
कछुआ रिंग को पहनने से पहले—
- गंगाजल या कच्चे दूध से शुद्ध करें
- “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का 11 या 108 बार जाप करें
- भगवान विष्णु का स्मरण करें
बिना शुद्धिकरण के पहनी गई रिंग उल्टा प्रभाव दे सकती है।
कछुआ रिंग पहनते समय भूलकर भी न करें ये गलती
हर व्यक्ति की कुंडली अलग होती है।
कुछ राशियों में कछुआ रिंग नुकसान पहुँचा सकती है।
टूटी कछुआ रिंग—
- धन हानि
- मानसिक अशांति
- दुर्घटना के योग
बढ़ा सकती है।
रात में सोते समय कछुआ रिंग उतार देना चाहिए।
4. क्रोध या नकारात्मक अवस्था में पहनना
गुस्से या तनाव की स्थिति में रिंग पहनना अशुभ माना जाता है।
यह सबसे आम और खतरनाक गलती है।
कछुआ रिंग से जुड़े लाभ:
- आर्थिक समृद्धि: धन की आवक को बढ़ाने में सहायक।
- सकारात्मक ऊर्जा: नकारात्मक ऊर्जा को दूर करता है।
- रिश्तों में सुधार: आपसी संबंधों को मजबूत करता है।
किसे कछुआ रिंग पहननी चाहिए?
- जिनका धन रुक-रुक कर आता है
- जिनके व्यापार में स्थिरता नहीं
- जिनकी कुंडली में चंद्र या गुरु कमजोर हो
- जो अत्यधिक मानसिक तनाव में रहते हों

किसे कछुआ रिंग नहीं पहननी चाहिए?
- जिनकी कुंडली में राहु-केतु अत्यंत प्रबल हों
- जो पहले से कई रत्न पहन रहे हों
- जिनका स्वभाव अत्यधिक उग्र हो
ऐसे लोगों को पहले ज्योतिषीय सलाह अवश्य लेनी चाहिए।
निष्कर्ष
कछुआ रिंग एक अत्यंत शक्तिशाली ज्योतिषीय उपाय है, लेकिन सिर्फ सही नियमों के साथ।
यदि इसे गलत तरीके से पहना जाए तो—
- धन लाभ की जगह हानि
- शांति की जगह तनाव
- सफलता की जगह रुकावट
आ सकती है।
इसलिए कछुआ रिंग पहनने से पहले उसके नियम, दिशा, उंगली, धातु और शुद्धिकरण का विशेष ध्यान रखें।





