ग्रह विशेष

कुंडली में केतु का प्रभाव

केतु एक रूप में राहु नामक ग्रह के सिर का धड़ है। यह सिर समुद्र मन्थन के समय मोहिनी अवतार रूपी भगवान विष्णु ने काट दिया था। यह एक छाया ग्रह है। माना जाता है कि इसका मानव जीवन एवं पूरी सृष्टि पर अत्यधिक प्रभाव रहता है। केतु को प्राय:...
व्रत एवं त्योहार

चतुर्थी तिथि के स्वामी श्री गणेष

तिथीषावहिनकौगौरी अर्थात् मूहुर्तचिंतामणि नामक ग्रंथ में उल्लेखित श्लोक के अनुसार प्रत्येक चतुर्थी तिथि के स्वामी गणेष भगवान हैं परंतु प्रत्येक...
Astrology

ज्योतिष क्यों जरूरी

आज मानव जिंदगी बहुत ज्यादा उतार-चढ़ावों से भरी हुई है। कभी कोई घटना हमें आष्चर्य में डाल देती है तो...
व्रत एवं त्योहार

वैनायकी गणेष चतुर्थी व्रत –

तिथीषावहिनकौगौरी अर्थात् मूहुर्तचिंतामणि नामक ग्रंथ में उल्लेखित श्लोक के अनुसार प्रत्येक चतुर्थी तिथि के स्वामी गणेष भगवान हैं परंतु प्रत्येक...
ग्रह विशेष

शनि है राजा!!!

आख्यान मिलता है कि शनि के प्रकोप से ही अपने राज्य को घोर दुर्भिक्ष से बचाने के लिये राजा दशरथ...
ग्रह विशेष

सप्तम भाव के ग्रहों की प्रतिकूल स्थिति से बाधित वैवाहिक जीवन

सप्तमभाव लग्न कुंडली में सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है। लग्न से सातवाॅ भाव ही दांपत्य व विवाह का ग्रह माना...
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