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ज्योतिष में राहु द्वारा निर्मित योग और उनका फल

ज्योतिष में राहु नैसर्गिक पापी ग्रह के रूप में जाना जाता है। राहु को Dragon's Head तथा North Node के नाम से भी जाना जाता है। राहु एक छाया ग्रह है। इनकी अपनी कोई राषि नहीं होती। अतः यह जिस राषि में होते हैं उसी राषि के स्वामी तथा भाव के अनुसार फल देते हैं। राहु केतु के साथ मिलकर कालसर्प नामक योग बनाता है जो कि एक अषुभ योग के रूप में प्रसि़द्ध है। इसी प्रकार यह विभिन्न ग्रहों के साथ एवं विभिन्न स्थानों में रहकर अलग-अलग योग बनाता...
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नक्षत्रों का महत्व

1- नक्षत्रों की खोज राशियों से पहले हुई थी। 2- पृथ्वी से नक्षत्र राशियों से भी अधिक दूरी पर स्थित हैं। 3- नक्षत्रों को अन्य धर्म में तारों के नाम से भी जाना जाता है। 4- जिस प्रकार कुछ तारों के समूह को राशि कहते हैं उसी प्रकार कुछ तारों के समूह को नक्षत्र कहते हैं। 5- राशियों के समान नक्षत्रों की आकृति भी निश्चित होती है। 6- जिस प्रकार भचक्र को 12 भागों में विभाजित करने पर 12 राशियां होती हैं उसी प्रकार भचक्र को 27 भागों में विभाजित...
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टैरो पद्धति एवं वैदिक ज्योतिष

टैरो पद्धति एवं वैदिक ज्योतिष दोनों को भविष्य फल कथन की विभिन्न प्रणालियों में से ऐसी विद्याएं मानी हैं जिनका भारत में ही नहीं बल्कि विश्व में सर्वाधिक प्रचलन हो रहा है। आज विज्ञान ने मानव जीवन को सरल एवं सुखमय बनाने के लिये जहां अनेक आविष्कार किये हैं, वहीं इन्हें सुखी बनाने वाले साधनों ने जीवन को इतना जटिल बना दिया है कि प्रत्येक व्यक्ति चिंताओं में डूबा है। अब इन चिंताओं के भार से दबी जिंदगी अपने जीवन की समस्याओं का निदान ज्योतिष अथवा टैरो में देखती है।...
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Venus:Guru of Demons

All the nine planets in Indian astrology (including the nodes) have distinct qualities, so their effects on our lives are also different and play a significant role to determine our paths of lives. In this article we are talking about the planet Venus. Venus is called the planet of beauty, the jewel of the sky, the planet of love, the planet of luxuries, entertainment and so on. There is no denying the fact that astronomically this is the most beautiful and brightest celestial object, next to only the Sun and...
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भृगुकालेंद्र पूजन से लायें बच्चों में अनुशासन एवं आज्ञापालन-

सनातन हिंदू धर्म बहुत सारे संस्कारों पर आधारित है, जिसके द्वारा हमारे विद्वान ऋषि-मुनियों ने मनुष्य जीवन को पवित्र और मर्यादित बनाने का प्रयास किया था। ये संस्कार ना केवल जीवन में विशेष महत्व रखते हैं, बल्कि इन संस्कारों का वैज्ञानिक महत्व भी सर्वसिद्ध है। गौतम स्मृति में कुल चालीस प्रकार के संस्कारों का उल्लेख किया गया है, वहीं महर्षि अंगिरा ने पच्चीस महत्वपूर्ण संस्कारों का उल्लेख किया है तथा व्यास स्मृति में सोलह संस्कारों का वर्णन किया गया है जोकि आज भी मान्य है। माना जाता है कि मानव...
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संवेदनशील चरित्र

मनुष्य के लिए जितने महत्वपूर्ण उसके शरीर तथा परिवेश के परिवर्तन होंगे, उतनी ही गहन उसकी भावनाएं होंगी। संवेगों के साथ श्वास और नाड़ी की गति में परिवर्तन आते हैं (उदाहरण के लिए, उत्तेजना के मारे आदमी हांफ सकता है, उसकी सांस रुक सकती है, उसका दिल बैठ सकता है), शरीर के विभिन्न भागों में रक्त का संचार घट-बढ़ जाता है (मुंह का शर्म से लाल हो जाना या डर से पीला पड़ जाना), अंत:स्रावी ग्रंथियों की क्रिया प्रभावित होती है (दुख के मारे आंसू निकलना, उत्तेजना के मारे गला...
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नारी के कितने स्वरुप

चहुंमुखी अर्थात सम्पूर्णता के साथ किया गया वरण (चयन) ही आवरण कहलाता है। वरण में कामना रहती है और माया का ही दूसरा नाम कामना है। अत: माया और आवरण पर्यायवाची कहलाते हैं। वरने की प्रक्रिया को वरण कहते हैं। इसमें मांगना, चुनना, छांटना आदि क्रियाएं समाहित होती हैं। कामना-इच्छा को भी वर कहते हैं, क्योंकि उनका वरण करने के बाद ही तो कामना पूर्ति के उपाय किए जाते हैं। ब्रह्म में कामना है, किन्तु विस्तार पाने की। माया स्वयं कामना है। अत: स्त्री और उसके सभी स्वरूप, चाहे पिछली...
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मन के कारक चंद्र

मन के कारक चंद्र से पूरा का पूरा व्यक्तित्व निर्मित होता है। कुण्डली में मुख्य रूप से लग्न और तृतीय भाव के स्वामी इंसानी चरित्र और व्यवहार के लिए जिम्मेदार होते हैं किंतु चंद्रमा जो कि चतुर्थ भाव का स्वामी ग्रह है, उससे मन की दृढ़ता या उसकी कमजोरी निश्चित होती है। यहां आज हम मन के स्वामी ग्रह चंद्रमा का व्यक्तित्व पर पडऩे वाले प्रभाव की चर्चा करेंगे। चंद्रमा की मजबूती या कमजोरी उसके पक्ष बल से निर्धारित होती है। यदि किसी जातक का जन्म अमावस्या या कृष्ण पक्ष...
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कुंडली अनुसार करे बच्चों का पालन

सनातन हिंदू धर्म बहुत सारे संस्कारों पर आधारित है, जिसके द्वारा हमारे विद्वान ऋषि-मुनियों ने मनुष्य जीवन को पवित्र और मर्यादित बनाने का प्रयास किया था। ये संस्कार ना केवल जीवन में विशेष महत्व रखते हैं, बल्कि इन संस्कारों का वैज्ञानिक महत्व भी सर्वसिद्ध है। गौतम स्मृति में कुल चालीस प्रकार के संस्कारों का उल्लेख किया गया है, वहीं महर्षि अंगिरा ने पच्चीस महत्वपूर्ण संस्कारों का उल्लेख किया है तथा व्यास स्मृति में सोलह संस्कारों का वर्णन किया गया है जोकि आज भी मान्य है। माना जाता है कि मानव...
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कृषि उत्पादन के सहयोगी तत्व वायु,वृष्टि व भूमि की उपयोगिता

प्राचीन काल से आज तक मनुष्य अपनी क्षुधा को शांत करने के लिए प्रकृति पर अविलम्बित रहा है। प्रकृति ने भी उसे अपनी ममतामयी गोद में कृषि के माध्यम से शस्य (धान्य) से समृद्ध बनाया। किन्तु वृष्टि, अनावृष्टि, अतिवृष्टि, दुर्भिक्ष आदि अनेक प्राकृतिक अपदाओं का भय भी अक्सर देखा ही जा रहा है और इनसे निपटने के लिए ज्योतिष की सहायता ली जा सकती है। भारतीय ज्योतिष शास्त्र इस मामले में बेजोड़ है। ज्योतिष शास्त्रानुसार प्रत्येक घटना के घटित होने के पहले प्रकृति में कुछ विकार उत्पन्न देखे जाते हैं...
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रावन कौन है

पुलत्स्य ऋषि के उत्कृष्ट कुल में जन्म लेने के बावजूद रावण का पराभव और अधोगति के अनेक कारणों में मुख्य रूप से दैविक एवं मानवीय कारणों का उल्लेख किया जाता है। दैविक एवं प्रारब्ध से संबंधित कारणों में उन शापों की चर्चा की जाती है जिनकी वजह से उन्हें राक्षस योनि में जाना पड़ा। शक्तियों के दुरुपयोग ने उनके तपस्या से अर्जित ज्ञान को नष्ट कर दिया था। ब्राह्मण कुल में जन्म लेने के बावजूद अशुद्ध, राक्षसी आचरण ने उन्हें पूरी तरह सराबोर कर दिया था और हनुमानजी को अपने...
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गुरु ही आपके गुरु है

गुरूब्र्रह्मा गुरूर्विष्णु गुरूर्देवो महेश्वर:। गुरु: साक्षात परं ब्रह्म तस्मै श्री गुरवे नम:॥ गुरु का अर्थ है अंधकार या अज्ञान और रु का अर्थ है उसका निरोधक यानी जो अज्ञान के अंधकार से बाहर निकाले वही गुरु। गुरु पूर्णिमा का पावन पर्व अपने आराध्य गुरु को श्रद्धा अर्पित करने का महापर्व है। योगेश्वर भगवान कृष्ण श्रीमद्भगवतगीता में कहते हैं, हे अर्जुन! तू मुझमें गुरुभाव से पूरी तरह अपने मन और बुद्धि को लगा ले। ऐसा करने से तू मुझमें ही निवास करेगा, इसमें कोई संशय नहींं। गुरु की महत्ता के बारे...
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दशहरा पर्व की उत्पत्ति

दशहरा उत्सव की उत्पत्ति के विषय में कई कल्पनायें की गयी हैं। भारत के कतिपय भागों में नये अन्नों की हवि देने, द्वार पर धान की हरी एवं अनपकी बालियों को टाँगने तथा गेहूँ आदि को कानों, मस्तक या पगड़ी पर रखने के कृत्य होते हैं। अत: कुछ लोगों का मत है कि यह कृषि का उत्सव है। कुछ लोगों के मत से यह रणयात्रा का द्योतक है, क्योंकि दशहरा के समय वर्षा समाप्त हो जाती है, नदियों की बाढ़ थम जाती है, धान आदि कोष्ठागार में रखे जाने वाले...
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जाने बंगाल की दुर्गा पूजा के बारे में

दुर्गा पूजा का पर्व भारतीय सांस्कृतिक पर्वों में सबसे ज़्यादा लोकप्रिय है। लगभग दशहरा, दीवाली और होली की तरह इसमें उत्सव धार्मिकता का पुट आज सबसे ज़्यादा है। बंगाल के बारे में कहा जाता है कि बंगाल जो आज सोचता है, कल पूरा देश उसे स्वीकार करता है। बंगाल के नवजागरण को इसी परिप्रेक्ष्य में इतिहासकार देखते हैं। यानि उन्नीसवीं शताब्दी की भारतीय आधुनिकता के बारे में भी यही बात कही जाती है कि बंगाल से ही आधुनिकता की पहली लहर का उन्मेष हुआ। स्वतंत्रता का मूल्य बंगाल से ही...
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असत्य पर सत्य की जीत विजयादशमी

हर तरफ फैले भ्रष्टाचार और अन्याय रूपी अंधकार को देखकर मन में हमेशा उस उजाले की चाह रहती है जो इस अंधकार को मिटाए। कहीं से भी कोई आस ना मिलने के बाद हमें हमारी संस्कृति के ही कुछ पन्नों से आगे बढऩे की उम्मीद मिलती है। हम सबने रामायण को किसी ना किसी रूप में सुना, देखा और पढ़ा ही होगा। रामायण हमें यह सीख देता है कि चाहे असत्य और बुरी ताकतें कितनी भी ज्यादा हो जाएं, पर अच्छाई के सामने उनका वजूद एक ना एक दिन मिट...
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अचानक धनी बनने के योग

लोग अचानक धनी बनने का ख्वाब पाल लेते हैं। उनमें बिना अधिक श्रम किए समृद्ध होने की लालसा इतनी प्रबल होती है कि वे सट्टा, लाटरी, कमोडिटी या फिर शेयर मार्केट की ओर झुक जाते हैं। इसमें से अधिकांश के साथ हालत ये तक हो जाती है कि वे अपनी पूरी जमा-पूंजी, चल-अचल संपत्ति बेच-बाच कर सारा धन अपनी इच्छा पूर्ति के लिए लगा देते हैं। और ज्यादातर मामलों में परिणाम मनोनुकूल नहींं मिल पाता है। अधिकांश इस शौक के पीछे बर्बाद तक हो जाते हैं वहीं कुछ ऐसे भी...
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