अस्त ग्रहों का फल
सूर्य को ग्रहों का राजा कहा जाता है। जो ग्रह सूर्य से एक निष्चित अंषों पर स्थित होने पर अपने…
सूर्य को ग्रहों का राजा कहा जाता है। जो ग्रह सूर्य से एक निष्चित अंषों पर स्थित होने पर अपने…
विभिन्न कालसर्प योगों के प्रतिफल दाती राजेश्वर महाराज अनंत कालसर्प योग के कारण व्यक्ति के जीवन में संघर्ष, विराग, अपनों…
’’बाधक’’ क्या है ? किसी कार्य में बाधा या रुकावट उत्पन्न करने वाला ग्रह ’’बाधक’’ कहलाता है। जन्म कुंडली के…
यदि कारकांश लग्न में शुक्र या चंद्र हो और वहां स्थित चंद्र को बुध देखता हो तो जातक डाॅक्टर होता…
मेष राशि: मेष राशि वालों के लिए शनि वक्री लाभदायक साबित होगी। थोड़ा शारीरिक कष्ट हो सकता है।जॉब में लाभ…
भारतीय ज्योतिष शास्त्र में चंद्रमा को प्रमुख स्थान दिया गया है तथा माना गया है कि चंद्रमा मन का कारक…
विभिन्न शास्त्रों में कालसर्प योग के बारे में विभिन्न धारणाएॅ प्रस्तुत हैं, जिसमें सभी में एक मत है कि राहु…
प्राचीन काल से मान्यता है कि श्रवण और भरणी नक्षत्र में किए गए पूण्यकार्य से पाप एवं शाप की निवृत्ति…
सौरमंडल से आने वाली किरणें खास कर शुक्र से आने वाली किरणें मनुष्य के व्यक्तित्व व दांपत्य जीवन में गाहे-वगाहे…
राहु के सम्बन्ध में समुद्र मंथन वाली कथा से प्राय: सभी परिचित है, एक पौराणिक आख्यान के अनुसार राहु दैत्यराज…
व्याख्यान मिलता है कि शनि के प्रकोप से ही अपने राज्य को घोर दुर्भिक्ष से बचाने के लिये राजा दशरथ उनसे…
आमतौर पर वैदिक ज्योतिष में जब ग्रह कमजोर या अशुभ स्थिति (Debilitated and inaspicious position of planets) )मे होते है…
वैदिक ज्योतिष के अनुसार कुंडली से की जाने वाली गणनाओं के लिए महत्वपूर्ण माने जाने वाले सताइस नक्षत्रों में से…
किसी जातक की प्रकृति अथवा उसका मूलभूत व्यवहार उसके जन्म के समय से ही निर्धारित हो जाता है। कुछ गंभीर…
व्यक्ति के जीवन में कई बार आकस्मिक हानि प्राप्त हेाती है साथ ही कई बार योग्यता तथा सामथ्र्य होने के…
1. जो व्यक्ति हस्ताक्षर में अक्षर नीचे से ऊपर की ओर जाते हैं तो वह ईश्वर पर आस्था रखने एवं…
किसी भी जातक की कुंडली में चार केंद्र स्थान प्रथम, चतुर्थ, सप्तम व दशम भाव होता है। दशम भाव कर्म…
किसी भी जातक के जन्म कुंडली में ग्रहों की स्थिति के अलावा उसके ग्रह दषाओं के अनुरूप उसका व्यवहार तथा…
आधुनिक भागदौड़ के इस जीवन में प्रायः सभी व्यक्तियों को चिंता सताती रहती है। हर आयुवर्ग तथा हर प्रकार के…
सृष्टि के आरंभ से ही नर और नारी में परस्पर आकर्षण विद्यमान रहा है, जिसे प्राचीन काल में गंर्धव विवाह…
ज्योतिष शास्त्र में शुक्र ग्रह को प्रमुखता प्राप्त है। कालपुरूष की कुंडली में शुक्र ग्रह दूसरे अर्थात् संपत्ति एवं सुख…
भारतीय वैदिक ज्योतिष में मंगल को मुख्य तौर पर ताकत और आक्रमण का कारक माना जाता है। मंगल के प्रबल…
यदि गुरू या शुभ ग्रह लग्न में अनुकूल हो तो व्यक्ति को स्वयं ही ज्ञान व आध्यात्म के रास्ते पर…
सृष्टि के आरंभ से ही नर और नारी में परस्पर आकर्षण विद्यमान रहा है, जिसे प्राचीन काल में गंर्धव विवाह…
ज्योतिषिय विज्ञान में व्यक्ति को सुख तथा समृद्धि प्रदान कर्ता ग्रह शुक्र को माना जाता है। यदि किसी जातक…
जितनी सूक्ष्मता प्रबंधन विषय में आवश्यकता होती है, उससे कहीं अधिक बारीकियों और सूक्ष्म गणनाओं का विषय है-कुंडली विवेचन। कुशल…
निरंतर चलायमान रहने अर्थात् किसी जातक को अपने जीवन में निरंतर उन्नति करने हेतु प्रेरित करने तथा बदलाव हेतु तैयार…
प्रत्येक ग्रह कुछ विकिरण बल या शक्तिबल का केंद्र होता है। ग्रहों के इस विकिरण का संसार के सभी जीवों…
भारतीय ज्योतिष शास्त्र में चंद्रमा को प्रमुख स्थान दिया गया है तथा माना गया है कि चंद्रमा मन का कारक…
सौरमंडल से आने वाली किरणें खास कर शुक्र से आने वाली किरणें मनुष्य के व्यक्तित्व व दांपत्य जीवन में गाहे-वगाहे…
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