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बाल मृत्यु का ज्योतिषीय विवेचन-

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बाल मृत्यु का ज्योतिषीय विवेचन-
केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के आंकड़ों की मानें तो बाल मृत्यु दर के मामले में भारत की स्थिति बेहद चिंताजनक है। देश में हर वर्ष 13 लाख 59 हजार बच्चे पांच वर्ष की उम्र पूरा करने से पहले ही मौत का शिकार बन जाते हैं। एक आंकड़े के मुताबिक पांच साल की उम्र के बच्चों में 43 फीसदी अंडरवेट होते हैं। यानी कहा जा सकता है कि दुनिया के सर्वाधिक कुपोषित बच्चे भारत में रहते हैं। बानगी के तौर पर देश के सबसे बड़े राज्य यूपी में गर्भवती महिलाओं और उनके शिशुओं की मृत्यु दर का औसत विश्व के सर्वाधिक पिछड़े कहे जाने वाले क्षेत्रों विशेषकर अफ्रीका और लातिन अमेरिकी देशों के समान है। किंतु यदि हम समाज और परिवार के साथ इसका ज्योतिषीय विवेचन करें तो देखेंगे कि किसी भी षिषु के जन्मांग में उसका लग्नेष, द्वितीयेष, भाग्येष यदि छठवे, आठवे या बारहवे बैठ जाये तो ऐसे बच्चे का जन्म आर्थिक रूप से अक्षम परिवार या समाज में होता है, जिसके कारण उसे जन्म से ही उचित पोषण की प्राप्ति नहीं हो पाती और यदि उसके लग्न या तीसरे स्थान या द्वादष स्थान में शनि हो तो उसके लीवर में कमजोरी के कारण भी उसका उचित पोषण नहीं हो पाने के कारण आर्थिक समक्षता के बावजूद भी शारीरिक कमजोरी रह जाती है…अतः सरकारी तौर पर कमजोर परिवार को पौष्टिक आहार गर्भवती महिलाओं के लिए दिया जाना जिससे बच्चे कुपोषण से बचे और स्वस्थ बनें साथ ही परिवार को बच्चे के स्वास्थ्य हेतु मंत्र जाप तथा व्रत करना चाहिए….

Pt.P.S.Tripathi
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